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जंगल सत्याग्रह के 100 साल: गट्टासिल्ली में उमड़े हजारों आदिवासी

Posted on March 4, 2023 - 4:59 pm by

छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले के बेलर ब्लॉक के गट्टासिल्ली जंगल सत्याग्रह के 100 वर्ष पूरे हो गए. इस अवसर पर पूरे छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर  आदिवासी समुदाय के ले काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जुट रहे हैं. इस जंगल सत्याग्रह का आयोजन एकता परिषद ने किया है. एकता परिषद ने छत्तीसगढ़ के हजारों आदिवासी प्रतिनिधियों के साथ सत्याग्रह स्तंभ पर पुष्पांजलि देकर पदयात्रा प्रारंभ की.

क्या था जंगल सत्याग्रह

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों ने कई सत्याग्रह आन्दोलन किए थे. उन्हीं में से एक आन्दोलन जंगल सत्याग्रह था. वर्ष 1930 में महात्मा गाँधी के आह्वान पर मध्य भारत के बैतूल जिले से जंगल सत्याग्रह की शुरुआत हुई थी. जिसके बाद पूरे देश के आदिवासी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ इस जंगल सत्याग्रह में शामिल हुए थे. इस सत्याग्रह में आदिवासियों के एक महानायक का नाम सरदार गंजन सिंह कोरकू था. क्रांतिकारी गंजन सिंह कोरकू के नाम से अंग्रेज कांपते थे और उसकी एक झलक पाने के लिये लोगों का हुजूम उमड़ता था.

आदिवासियों को वनाधिकार सौंप देना चाहिए

जंगल सत्याग्रह के 100 वर्ष होने पर उड़ीसा से पूर्व केंद्रीय मंत्री भक्तचरण दास ने कहा कि यूपीए सरकार के द्वारा लाए गए वन अधिकार कानून की मंशा आदिवासियों को उनके वन अधिकार देना रहा. जंगल को बचाने के लिए जंगल का अधिकार आदिवासियों को देना होगा. वहीं अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के मनीष कुंजाम ने कहा कि सरकार को अभियान चलाकर आदिवासियों को वन का अधिकार सौंप देना चाहिए.

जंगल सत्याग्रह इतिहास के लेखक आशीष ठाकुर ने कहा की पहले जंगल काटकर सत्याग्रह सौ साल पहले शुरू हुआ था अब जंगल बचाकर सत्याग्रह करना होगा. सरगुजा के सामाजिक कार्यकर्ता गंगाराम पैंकरा ने कहा की बहुत सारे जगहों पर आदिवासियों को वन अधिकार मिला है, उसे और भी सक्रियता के साथ बाकी बचे हुए दावेदारों को देने की जरूरत है.

इसके अलावा कवर्धा के बैगा आदिवासी नेता शिकारी बैगा ने कहा कि सरकार हमारी जमीन की समस्या हल करे.

इस सत्याग्रह में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के साथ साथ राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी समुदाय के लिए काम करने वाले सामाजिक संगठनों के साथी भाग ले रहे हैं. सत्याग्रह के पूर्व एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल ने आज पास के कई गांवों का भ्रमण कर आदिवासियों की वन भूमि समस्याओं को जाना और पीडि़तों अपना आंदोलन जारी रखने के लिए प्रेरित किया.

मौके पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम, पूर्व केन्द्रीय मंत्री भक्तचरण दास, अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के मनीष कुंजाम, एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रनसिंह परमार, किसान आंदोलन के सुदेश पैंकरा, आसाम के आदिवासी सांसद नब्बासरण्या, सरगुजा के आदिवासी नेता गंगाराम पैंकरा, राष्ट्रीय संयोजक अनिष कुमार, वरिष्ट कार्यकर्ता अनिल भाई , हरियाणा के राकेश तंवर वीरेश ठाकुर इंदल मंडावी इतवारीन बाई देव सिंह टिकेश्वर सिन्हा अशोक राम शिव कुमारी खेलु राम दान सिंह मरकाम कुंवर सिंह अखिलेश प्रजापति कमलेश मंडावी मोहन मरकाम देश भर के गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता और जंगल सत्याग्रह के सत्याग्रही परिवार के वंशज भी भाग ले रहे हैं.

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