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कर्नाटक:  मैसुरु के 13 हजार आदिवासी परिवारों को नहीं मिला है वनाधिकार

Posted on March 21, 2023 - 12:02 pm by

कर्नाटक के मैसुरू में आदिवासियों ने 20 मार्च को एक प्रदर्शन किया, जिसमें आदिवासियों ने पुनर्वास और भूमि अनुदान की मांग की. इस प्रोटेस्ट में हुनसुर, पेरियापटना और एचडी कोटे के आदिवासी शामिल थे. उन्होंने लंबित मांगों को जल्द समाधान करने को कहा. इसके अलावा मैसुरु के 13 हजार आदिवासी परिवारों को वनाधिकार नहीं मिला है,

आदिवासी और दलितों ने एक साथ एकजुटता दिखाई, क्योंकि उसकी शिकायतें लगभग समान थी. आदिवासी नेता कर्नाटक दलित चालुवली नवनिर्माण वेदिके के बैनर तले दलित कार्यकर्ताओं के साथ जुटे थे.

उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति दोनों के लिए आंतरिक आरक्षण का विस्तार करने मांग उठायी. उनका आरोप है कि कई प्रमुख समुह(Dominant Group) अल्पसंख्यकों और अधिक कमजोर वर्गों को छोड़कर आरक्षण के बड़े हिस्से को हड़प रहे हैं.

आदिवासियों ने पारंपरिक वन भूमि में लघु वन उत्पादों, धार्मिक पूजा स्थलों और कब्रिस्तानों के अधिकार को पाने के लिए वन अधिकार से संबंधित मुद्दो को उठाया.

एस श्रीकांत ने कहा कि आदिवासी समुदाय पिछले 70 सालों से अपनी जमीन पर खेती कर रहे हैं. लेकिन सरकार उन्हें जमीन का पट्टा नहीं दे सकी. जिसके कारण उन्हें लोन प्राप्त करने में पीछे रह गए.

श्रीकांत ने कहा कि मौसुरु जिले में 13 हजार ऐसे परिवार है, जिन्हें अब तक वन अधिकार नहीं मिले है. ये परिवार 219 बस्तियों में फैले हुए हैं, जबकि अधिक कमजोर आदिवासी समुह (PVTGs) जेनु कुरुबा 164 बस्तियों में थे, उनके अधिकारों को मान्यता दी जानी चाहिए.

इसके अलावा आदिवासियों ने मुजफ्फर असदी रिपोर्ट को लागू करने की भी मांग की, जिसके अनुसार 3,418 आदिवासी परिवारों का उचित पुनर्वास किया जाना है.

श्रीकांत ने कहा कि वे यह भी चाहते हैं कि सरकार पंचायत विस्तार के प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम तक विस्तारित करे, ताकि उन क्षेत्रों में आदिवासी स्वशासन हो जहां आदिवासी आबादी अधिक है.

उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी संस्कृति को पुनर्जीवित करने और विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

वहीं प्रोटेस्ट कर रहे कार्यकर्ताओं ने हुन्सुर में लक्ष्मणतीर्था नदी के बढ़ते प्रदूषण की ओर भी ध्यान आकर्षित किया. प्रदूषण को दूर करने और नदी को फिर से जीवंत करने के लिए एक परियोजना की मांग की.

कार्यकर्ताओं के अनुसार लक्ष्मणतीर्थ नदी लगभग 40 बड़े जल निकायों को भरने में मदद करती है और इसलिए इस क्षेत्र के लिए इसका संरक्षण किया जाना जरूरी है.

(Photo: The hindu)

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