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मध्यप्रदेश: 25 हजार आदिवासी करेंगे ‘हलमा’ की मुहिम, राष्ट्रपति हो सकती हैं शामिल

Posted on February 3, 2023 - 11:03 am by

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्र झाबुआ में संकट में मदद करने और पर्यावरण को बचाने के लिए ‘हलमा’ की सदियों पुरानी परंपरा का आयोजन किया जा रहा है. इस महीने के अंतिम सप्ताह में और बड़ी होती जा रही है. वार्षिक दो दिवसीय आयोजन में मानसून में पानी के संरक्षण के लिए हाथीपावा पहाड़ी के चारों ओर समोच्च खाइयों को खोदने के लिए तीन राज्यों के भील जनजातियों के लगभग 25,000 लोगों की भागीदारी देखी जा सकती है. भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कारण का समर्थन करने के लिए जिले का दौरा करने की संभावना है.

हलमा को भील जनजातियों की एक पुरानी परंपरा कहा जाता है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से लड़ने के लिए लगभग डेढ़ दशक पहले इसे पुनर्जीवित किया गया और बड़े पैमाने पर बढ़ाया गया. ‘शिवगंगा अभियान’ के राजाराम कटारा ‘ ने कहा कि इस साल यह कार्यक्रम 25-26 फरवरी को आयोजित किया जाएगा. जिसमें झाबुआ, अलीराजपुर और पड़ोसी गुजरात और राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लगभग 25,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है.

परंपरा के अनुसार झाबुआ के हाथिपावा क्षेत्र की पहाडी पर पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के कार्य को एक साथ हजारों आदिवासी गैति, फावडा, तगारी लेकर अंजाम देगें और हजारों की संख्या में कंटॅूर ट्रंचिंग पहाडी पर खोदेगें. जिससे की बारिस में जल को रोका जा सके और जिससे झाबुआ के तालाबों व लेागों को पर्याप्त पानी मिल सके ऐसा करने से भूमिगत जल लेवल बढ जाता है. इसी के साथ में इस पूरे पहाडी क्षेत्र में बडीसंख्या में वृक्ष लगाये जा रहे है. यह कार्य पिछले लंबे समय से किया जा रहा है. जिसके कारण आज हाथीपावा पहाडी क्षेत्र विकसित वन के रूप में पल्लवीत हो रहा है. वहीं यहां कई प्रकार के वन्य जीव जंतु भी रहने लगे है. जिनमें तेंदूआ, मोर, लोमडी, हिरन, निलगाय, बंदर आदि जानवर शामिल है.

पीएम मन की बात में कर चुके हैं जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले साल 24 अप्रैल 2022 में अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में ‘हलमा’ का जिक्र करते हुए कहा था कि मध्य प्रदेश की भील जनजाति की जल संरक्षण का अद्भुत संदेश देने वाली यह ऐतिहासिक परंपरा सराहनीय है. और अनुकरणीय है और यह सभी को प्रेरित करेगा.

हर साल आईआईटी और आईआईएम के कई छात्र आयोजन का अध्ययन करने झाबुआ और अलीराजपुर जिले में पहुंचते हैं. जबकि इस साल भारत के राष्ट्रपति की यात्रा के साथ-साथ वरिष्ठ राजनेताओं और राज्य सरकार के मंत्रियों को ‘हलमा’ नामक सामुहिक काम के लिए अपना समर्थन देने की उम्मीद है. इसके अलावा जी-20 शिखर सम्मेलन के प्रतिनिधियों के भी कार्यक्रमों में शामिल होने की उम्मीद है. झाबुआ कलेक्टर रजनी सिंह के मुताबिक भारत के राष्ट्रपति का झाबुआ दौरा प्रस्तावित है, लेकिन इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है.

हलमा में शामिल महिलाएं

क्या है हलमा


हलमा आदिवासी जनजाति में एक सामूहिक आयोजन को कहा जाता है, जब भी किसी परिवार या गांव क्षेत्र में कोई आपदा या विपदा आती है. या व्यक्ति को या गांव को क्षेत्र को सहायता की आवश्यकता होती है तो पूरे के पूरे गांव के लोग एक जगह एकत्र होकर उसकी सहायता करते है. जैसे की किसी गांव में तालाब बनाना है, कुंआ खोदना है या फिर किसी किसान के पास खेत जोतने के लिये पर्याप्त संसाधन नहीं है तो ऐसे में पूरे गांव के लोग एकत्र होकर एक साथ मिलकर उस काम को पूरा करने के लिये जुटते है और कई दिनों, महिनों के काम को कुछ ही समय में पूरा कर देते है. उसके बदले में कोई पारिश्रमिक नहीं लिया जाता. बल्कि खुशी से व्यक्ति उन एकत्रित लोगों को नाश्ता या भोजन अपनी इच्छा शक्ति से करवा देता है इस सामूहिक प्रयास को ही हलमा कहां जाता है.

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