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उत्तरप्रदेश: आधार कार्ड ने आदिवासी युवती को परिवार से मिलवाया

Posted on November 2, 2022 - 12:53 pm by

पांच साल पहले 23 साल की आदिवासी युवती लापता हुई थी. आधार कार्ड डेटाबेस की मदद से झारखंड में अपने परिवार से मिल गई है. युवती के पिता झारखंड में एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं.

दिल्ली में नौकरी का वादा किया गया था

युवती रश्मणि को 2017 में एक एजेंट ने दिल्ली में नौकरी देने का वादा किया था. चूंकि उसका परिवार जबरदस्त आर्थिक दबाव में था,  वे सहमत हो गए. हालांकि,  एजेंट के साथ ट्रेन में चढ़ने के बाद रश्मणि को शक हुआ और वह फतेहपुर स्टेशन पर फरार हो गई. उसे रेलवे पुलिस ने बचाया और एक आश्रय गृह में रखा गया जहां उसका नाम राशी रखा गया है. जब उसके मूल स्थान पर जाने के कई प्रयास विफल रहे.  तो पुलिस ने उसे इलाहाबाद के महिला आश्रय गृह भेज दिया.

पुनर्वास के लिए लखनऊ लाया गया था

लखनऊ में महिला आश्रय गृह की अधीक्षक आरती सिंह ने बाताया कि जुलाई में  रश्मणि को पुनर्वास के लिए लखनऊ लाया गया था. हमने उसके आधार कार्ड के लिए आवेदन किया था. इसे अस्वीकार कर दिया गया था. छठे प्रयास में  इसने दोहराव दिखाया. इससे इसके घर के क्षेत्र का पता चला. इसके बाद मूल एड्रेस का पता लगाया गया. इसके बाद रश्मणी को झारखंड ले जाया गया. उसके परिवार के साथ फिर से मिला दिया गया.

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