Skip to main content

केरल: आदिवासी युवक को  झूठे केस में फंसाने का आरोप

Posted on October 25, 2022 - 12:49 pm by

केरल के इडुक्की ज़िले में एक वन अधिकारी का ट्रांसफर किया गया. इस अधिकारी का नाम अनिल कुमार है. अधिकारी पर आरोप है कि इसने एक आदिवासी लड़के को झूठे केस में फँसाया था. वन मंत्री के ऑफिस के अनुसार इस अधिकारी के ख़िलाफ़ विभागीय जाँच शुरू कर दी गई है.

वन विभाग ने सरिन साजी नाम के एक आदिवासी लड़के को गिरफ्तार किया था. जिसमें लड़के पर आरोप लगा था कि वह जंगली जानवरों का मांस बेच रहा था. क्षेत्र आदिवासी संगठनों और सत्ताधारी दल सीपीएम ने इस गिरफ़्तारी को ग़लत बताया था. तथा आदिवासी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था.

वन अधिकारी ने गिरफतार कर मारपीट की और मांस प्लांट की गई

वहीं वन अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने लड़के के ऑटो की तलाशी ली थी. उस ऑटो में हिरण का मांस पाया गया था. इस लड़के के पास जो मीट की मात्रा दो किलोग्राम बताई गई थी. आदिवासी संगठनों ने वन विभाग के इस दावे को पूरी तरह से ग़लत करार दिया है. उनका कहना था कि 29 सितंबर को सुबह 6 बजे उसने वनमाउ चेकपोस्ट पार किया था. उस समय उसके ऑटो से कुछ भी बरामद नहीं किया गया था. जिस आदिवासी लड़के पर हिरण के मांस बेचने का आरोप लगा है. उसकी उम्र 24 साल है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वन विभाग के अधिकारियों ने उसके साथ काफ़ी मारपीट की थी. उसके बाद इस लड़के को फँसाने के लिए ऑटो में हिरण का मांस प्लांट किया गया था. इस तरह के मामलों में नियमों के तहत रेंज ऑफ़िसर की रेंक के उपर के अधिकारी माहासर रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करते हैं. लेकिन इस आदिवासी लड़के से जुड़ी रिपोर्ट पर एक फॉरेस्ट रेंजर ने ही साइन किया है.

आदिवासी लड़के के परिवार के लोगों का कहना है कि इस घटना में जब इस लड़के को गिरफ़्तार किया गया था तो रेंज ऑफ़िसर वहाँ आए थे. लेकिन उन्होंने रिपोर्ट साइन नहीं की क्योंकि उन्हें शायद यह पता था कि मामला सच नहीं है. परिवार ने यह भी बताया है कि इस लड़के के ऑटो से बरामद बताए जा रहे मांस की जाँच भी अभी तक नहीं हुई है. इसलिए अभी तक यह नहीं पता है कि यह मांस जंगली हिरण का ही है या फिर किसी और जानवर का है.

ऑटो से होता है परिवार का भरण पोषण

वन अधिकारियों के अनुसार इस मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया गया है. वन विभाग ने कहा है कि इस मामले की जाँच में सच सामने आने की बात कही. उधर आदिवासी संगठनों का कहना है कि सरिन ऑटो चला कर अपने परिवार का पालन पोषण करता है. लेकिन काफी दिनों से उसका ऑटो वन विभाग के क़ब्ज़े में है. उसके परिवार का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की जानी चाहिए.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.