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ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन ने चकमा और हाजोंग को वापस बांग्लादेश भेजने की मांग की

Posted on January 20, 2023 - 11:48 am by

ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU) ने कहा है कि चकमा और हाजोंग शरणार्थी हैं और राज्य में अस्थायी रूप से बस गए हैं. लोग उन्हें राज्य के आदिवासी के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेंगे.

पत्रकारों से बात करते हुए पर चकमा और हाजोंग मुद्दे पर अध्यक्ष और आपसू के उपाध्यक्ष नबाम गांधी ने कहा कि संघ जल्द ही चकमा और हाजोंग के वापस भेजने(Deportation) पर चर्चा करेगा क्योंकि वे विदेशी हैं. यदि वे अन्य भारतीय राज्यों से होते, तो अस्थायी आवासीय प्रमाणपत्र (TRC) प्रदान किया जा सकता था, लेकिन दोनों समुदाय भारतीय नहीं हैं. इसलिए उन्हें आवासीय प्रमाण पत्र (RPC) या आवासीय प्रमाण का कोई अन्य रूप जारी करना स्वीकार्य नहीं है. साथ ही, कोई राजपत्र अधिसूचना नहीं है जो बताती है कि वे टीआरसी या आरपीसी के लिए पात्र हैं या नहीं.

चकमा और हाजोंग यहां के आदिवासी नहीं

उन्होंने आगे कहा कि आरसीसी की मांग को लेकर नई दिल्ली में चकमा और हाजोंग छात्र संघ द्वारा हालिया विरोध एक स्पष्ट संकेत है कि वे आदिवासी(Indigenous) नहीं हैं. आदिवासियों को राज्य सरकार के सामने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए, न कि केंद्र में. साथ ही उन्होंने कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत स्पष्ट निर्देश है कि इन शरणार्थियों को पूर्वोत्तर के कई राज्यों में नहीं बसाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार के पास दोनों समुदायों को निर्वासित(Exile) करने का पूरा अधिकार है.

गांधी ने यह भी बताया कि संघ राज्य सरकार के समक्ष चकमाओं और हाजोंगों के निर्वासन की मांग करेगा और चकमा और हाजोंग छात्र नेता संघ द्वारा लगाए गए विभिन्न आरोपों के जवाब में एक राज्यव्यापी विरोध भी आयोजित किया जाएगा.

वही ऑल अरुणाचल प्रदेश युथ ऑर्गानाइजेशन नामसाई जिले के विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची से चकमा और हाजोंग के नाम हटाने की मांग की है.

चकमा और हाजोंग अवैध नहीं

बता दें कि अरूणाचल प्रदेश में चकमा और हाजोंग आदिवासियों के आवासीय प्रमाण पत्र बनने पर रोक के कारण सैकड़ों लोगों ने 8 जनवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया. वे अपने आवासीय प्रमाण पत्र (आरपीसी) को बहाल करने की मांग कर रहे थे. जिसे पिछले साल अरुणाचल प्रदेश सरकार ने वापस ले लिया था. उन्होने कहा था कि वे भारत के वैध निवासी हैं अवैध नहीं.

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