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वन संरक्षण नियमों के साथ – साथ आदिवासियों के अधिकारों पर भी मोदी ने हमला किया है: जयराम रमेश

Posted on March 30, 2024 - 6:43 pm by
वन संरक्षण नियमों के साथ - साथ आदिवासियों के अधिकारों पर भी मोदी ने हमला किया है: जयराम रमेश

कांग्रेस ने शनिवार को पर्यावरण के मुद्दों पर नरेंद्र मोदी सरकार की “विफलताओं” को सूचीबद्ध किया. पार्टी के महासचिव और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के पिछले 10 साल न केवल भारत के लोगों और लोकतंत्र के लिए, बल्कि पर्यावरण और उस पर निर्भर लोगों के लिए भी विनाशकारी रहे हैं.

जयराम रमेश ने दावा किया कि मोदी सरकार ने स्थानीय समुदायों से उनके जंगलों पर अधिकार को छीना है और वन भूमि को मोदी सरकार ने “क्रोनी कॉर्पोरेट मित्रों” को सौंपने के लिए आसान बनाना है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि वन संरक्षण संशोधन अधिनियम के माध्यम से हमले के अलावा, मोदी सरकार ने 2022 वन संरक्षण नियमों के साथ आदिवासियों और वन समुदायों के पारंपरिक वन अधिकारों पर हमला किया है. उन्होंने कहा आदिवासी अब अपनी वन भूमि और संसाधनों पर कॉर्पोरेट कब्जे के प्रति असुरक्षित हैं.

इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर मोदी सरकार की 10 ‘विफलताओं’ को सूचीबद्ध किया है. जिनमें “विनाशकारी वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, आदिवासी विरोधी वन संरक्षण नियम, जैविक विविधता (संशोधन) को कमजोर करना, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में गुप्त संशोधन, वन मंजूरी के उल्लंघन के बाद परियोजनाओं को वैध बनाना, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को कमजोर करना मानदंड, स्वतंत्र पर्यावरण संस्थानों का विनाश, बढ़ता वायु प्रदूषण, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम कमजोर, और कोयला खदानें कॉर्पोरेट लॉबिंग पर देना शामिल है.

उन्होंने आरोप लगते हुए कहा कि, 1980 का वन संरक्षण अधिनियम वनों को अतिक्रमण और वनों की कटाई से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है. जिसे मोदी सरकार के 2023 के संशोधन ने अंदर से खोखला कर दिया है. उन्होंने आगे दावा किया कि कोयला खदानें कॉर्पोरेट लॉबिंग पर दी गईं हैं.

उन्होंने कहा, “मोदी युग के तहत किए जा रहे सबसे खराब पर्यावरणीय अपराधों में से एक संवेदनशील क्षेत्रों को कोयला ब्लॉकों के रूप में सौंपना है, मुख्य रूप से अडानी समूह को लाभ पहुंचाने के लिए. यह मोदानी घोटाले का एक नया घटक है जो सामने आता रहता है.”

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