Skip to main content

आंध्रप्रदेशः जनजातीय विकास के लिए मिले 124 करोड़, धरे रह गए 87 करोड़

Posted on February 15, 2023 - 10:17 am by
संसद में आदिवासी विशेष

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

आदिवासियों के विकास के लिए सरकारें कितनी गंभीर हैं, इसको सहज ही समझा जा सकता है. हाल ही में केंद्र सरकार ने माना है कि आंध्रप्रदेश में आदिवासियों के विकास के लिए 124 करोड़ से अधिक रुपए जारी किए गए हैं. लेकिन खर्च मात्र 37 करोड़ रुपए हैं. मंत्रालय के मुताबिक 87 करोड़ से अधिक रुपए धरे रह गए. हालांकि सरकार ने इन आंकड़ों की कलाबाजी के बीच ये कहा है कि आदिवासियों को विकास खूब हुआ है.

दरअसल आंध्रप्रदेश के काकीनाड़ा से सांसद  वांगा गीता विश्वनाथ ने इस संबंध में सवाल उठाए हैं. उन्होंने बजट सत्र के दौरान आदिवासी मामलों के मंत्रालय से पूछा कि आंध्रप्रदेश में ट्राइबल सब प्लान यानी टीएसपी के तहत कितने रुपए दिए गए और कितने रुपए खर्च हुए हैं. सासंद अपने इस संबंध में जिलावार आंकड़ें मांगे थे.

जवाब में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री सरूता सिंह ने बताया कि टीएसपी के तहत साल 2019-20 में 124 करोड़ 70 लाख 50 हजार रुपए आवंटित की गई है. इसमें से मात्र 37 करोड़ 42 लाख 59 हजार रुपए खर्च किए गए हैं. इस लिहाज से देखें तो 87 करोड़ 27 लाख 91 हजार रुपए धरे रह गए. इन्हें खर्च ही नहीं किया गया.

वहीं साल 2020-21 में 49 करोड़ 54 लाख 96 हजार रुपए आवंटित किए गए हैं. इसमें खर्च की गई राशि का डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया है. हालांकि सरकार ने उन्हें जिलावार आंकड़ें उपलब्ध नहीं कराए हैं.

क्या है टीएसपी  

आदिवासियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़क, आवास, विद्युतिकरण, रोजगार सृजन कौशल विकास आदि से संबंधित विकास परियोजनाओं के लिए केंद्रीय जनजाति मंत्रालय के द्वारा जनजातीय उप योजना में पैसे आवंटित किए जाते हैं. जिसे अनुसूचित जनजातियों के लिए विकास कार्य योजना के रूप में भी जाना जाता है.

इसकी शुरूआत साल 1974-75 में की गई थी. आदिवासियों के विकास संबंधी योजनाओं को जनजातीय कार्य मंत्रालय के अलावा 41 मंत्रालय/विभाग प्रत्येक वर्ष अपने कुल बजट योजना का कुछ प्रतिशत आवंटित करते हैं.

शिक्षा में सुधार

सरकार मान रही है कि आधे पैसे भी खर्च नहीं हुए, लेकिन वह ये कह रही है कि आंध्र प्रदेश के आदिवासियों के सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में सुधार हुए हैं. साल 2020-21 की बाल श्रम सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार राज्य में बाल साक्षरता दर बढ़कर 71.6 फीसदी पहुंच गई है. जबकि साल 2011 में यह 59 फीसदी थी.

उच्च प्राथमिक स्तर पर दाखिले का प्रतिशत 98.0 प्रतिशत हो चुका है. जबकि साल 2013-14 में यह 91.3 प्रतिशत था. वहीं माध्यमिक स्तर पर नामांकन दर 78.1 प्रतिशत पहुंच चुका है. साल 2013-14 में इसी वर्ग में नामांकन दर 70.02 था. सीनीयर माध्यमिक स्तर पर साल 2013-14 में 35.4 प्रतिशत मुकाबले साल 2021-22 में बढ़कर 52.0 हो गया है.

स्वास्थ्य का हाल

अनुसूचित जनजातियों के संबंध में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार शिशु मृत्यु दर 44.4 (2015-16) से घटकर 41.6 (2019-21) हो गई है. पांच वर्ष के कम आयु के बच्चों के मृत्यु दर 57.2 (2015-16) से घटकर 50.3 (2019-21) हो गई है.  वहीं संस्थागत प्रसव 68 फीसदी (2015-16) से बढ़कर 82.3 फीसदी (2019-21) हो गया है. इसके अलावा 12-23 महीने की आयु के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 55.8 फीसदी (2015-16) से बढ़कर 76.8 फीसदी हो गया है.

पूर्ववर्ती योजना आयोग के अनुमानों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का प्रतिशत 2004-05 में 62.3 फीसदी से घटकर 2011-12 में 45.3 फीसदी हो गई है.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.