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आंध्रप्रदेश:  आदिवासी सांस्कृतिक प्रदर्शनी से कैसे आदिवासियों का जीवन बदल रहा है

Posted on November 21, 2022 - 5:25 pm by

पार्वतीपुरम मान्यम जिले के सालूर की दसारी गौरी और एम. पोलय्या यहां आरके बीच पर आयोजित आदिवासी महोत्सव में आईटीडीए-पार्वतीपुरम स्टॉल पर बांस की टोकरियां और सजावटी फूल बनाने में व्यस्त थीं.

हम फूलों की टोकरियाँ और गुलदान प्रत्येक ₹100 में बेचते हैं. एक्सपो में मांग काफी अच्छी है. हम उत्पादों की बिक्री से आय लेते हैं. प्रदर्शनियां आयोजित करने से पहले ITDA के अधिकारी हमें पूर्व सूचना देते हैं, ताकि हम एक्सपो में बिक्री के लिए बड़ी मात्रा में उत्पादन कर सकें. हमारे भोजन और आवास का ध्यान अधिकारियों द्वारा रखा जाता है.  

द हिंदू के अनुसार येरूकुला से संबंधित रखने वाली गौरी और पोलय्या कहती हैं कि औसतन हम दो से तीन एक्सपो में भाग लेते हैं. ज्यादातर आंध्र प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर और कभी-कभी पड़ोसी राज्य ओडिशा में हमें आईटीडीए से अच्छा समर्थन मिल रहा है. जब कोई एक्सपो नहीं होता है, तो हम बेंत की टोकरियाँ और कुछ सजावटी सामान बनाते हैं और उन्हें एजेंसी क्षेत्रों में शैंडी में बेचते हैं या उन्हें विशाखापत्तनम और अन्य शहरों में भेजते हैं.

उन्होंने कहा, “आईटीडीए ने लकड़ी की घड़ी, फलों के स्टैंड और फूलों के फूलदान जैसे मूल्य वर्धित उत्पादों को विभिन्न आकार में बनाने में हमें प्रशिक्षित करने के लिए बेंगलुरु के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया है.”

मान्यम जिले के मैरिटिवलसा की एन. लक्ष्मी और बी. संतोषी को अपने स्टॉल पर हल्दी, इमली, उड़द, मूंग और बाजरे के बिस्कुट जैसे कृषि उत्पाद बेचते देखा गया.

संतोषी कहती है कि इन प्रदर्शनियों के माध्यम से ITDA द्वारा किए गए विपणन ने बिचौलियों को समाप्त कर दिया है, जो पहले हमारा शोषण कर रहे थे. जब कोई प्रदर्शनी नहीं होती है, तो हम हर मंडल में राज्य सरकार द्वारा स्थापित वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके) के माध्यम से अपनी उपज बेचते हैं.

ITDA-Paderu द्वारा स्थापित एक अलग स्टाल ने कृषि उत्पादों को प्रदर्शित किया. हमने विभिन्न VDVKs से उत्पाद खरीदे हैं. आईटीडीए के एक कर्मचारी पद्मावती ने बताया कि हमें पेड़ाबयालु से हल्दी, चिंतापल्ली से काली मिर्च, अनंतगिरी से कॉफी और डुमब्रिगुडा से इमली और बाजरे के बिस्कुट मिलते हैं.

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