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आंध्र प्रदेश: अधिकारियों ने नहीं सुनी, आदिवासियों ने श्रमदान कर सड़क बनाया

Posted on November 8, 2022 - 1:47 pm by

आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के अनंतगिरी मंडल के पिनाकोटा, जीनाबादु और पेड़ा कोटा पंचायतों के रिमोट क्षेत्रों के आदिवासियों ने श्रमदान कर 10 किलोमीटर की सड़क का निर्माण शुरू कर दिया है.  क्योंकि संबंधित अधिकारियों ने सड़क बनाने के लिए उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया.

बीमार को डोली में लेकर 7 से 15 किलोमीटर तक जाना पड़ता है

3 नवंबर की सुबह सात बजे कुल 180 आदिवासियों ने काम शुरू किया. करीब चार घंटे तक काम करते हुए उन्होंने 1 किमी तक जमीन को समतल कर दिया. ऐसे समय में जब भारत आजादी के 75 साल पूरे होने पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’  मना रहा है. सड़कों की कमी के कारण आदिवासियों को गर्भवती महिलाओं और बीमारों को ‘डोली’ में ले जाकर 7 से 15 किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ता है. जिससे सड़क तक पहुंचा जा सके और वहां से एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल ले जाया जा सके. अस्पताल पहुंचने में देरी के कारण महिलाओं के रास्ते में बच्चे पैदा करने की नौबत आती है.

जनप्रतिनीधि वोट मांगते हैं लेकिन समस्या पर ध्यान नहीं देते

आदिवासियों का आरोप है कि जो जनप्रतिनिधि चुनाव से पहले वोट मांगते हैं, वे निर्वाचित होने के बाद उनकी समस्या पर ध्यान नहीं देते. आदिवासी नेताओं का आरोप है कि 2004 में फूड फॉर वर्क (एफएफडब्ल्यू) कार्यक्रम के तहत एक सड़क को मंजूरी दी गई थी. 2008 तक  केवल जंगल की सफाई की गई थी. यहां तक ​​कि ठेकेदार द्वारा वादा किया गया चावल भी नहीं दिया गया था.

2013-14 में  सामग्री के लिए ₹ 9 लाख और मनरेगा के तहत श्रम लागत के लिए ₹ 21 लाख स्वीकृत हुई थी. जिसमें बल्लागरुवु से रेड्डीपाडु और राचकिलम के माध्यम से पालाबंध गांवों तक सड़क के निर्माण होना था. गिरिजन संघम के नेताओं ने कहा कि अधिकारियों ने एक बार फिर उन्हें सड़क निर्माण के लिए झाड़ियों को साफ करने का काम दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने उन्हें उनके श्रम के लिए भुगतान नहीं किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कहा था कि काम के लिए मशीनरी लगाई जाएगी,  लेकिन ऐसा नहीं हुआ.  जिसके परिणामस्वरूप स्वीकृत धनराशि समाप्त हो रही है.

तंग आकर युवकों ने स्वयं सड़क निर्माण करने का निर्णय किया

माकपा जिला सचिवालय के सदस्य के गोविंदा राव कहते हैं कि अधिकारी बार-बार कह रहे हैं कि सड़क का काम हो जाएगा. हालाँकि सरकारें बदल रही थीं और अधिकारियों का तबादला हो रहा था, काम लंबित है. “जब आईटीडीए के परियोजना अधिकारी रोनांकी गोपालकृष्ण ने पिछले साल दयारथी गांव का दौरा किया था.  तो हमने उन्हें अपनी समस्या से अवगत कराया था. बाद में  उन्होंने एमपीडीओ को एक सर्वेक्षण करने और अनुमान तैयार करने के लिए भेजा. “

इस समस्या से तंग आकर आदिवासी युवकों ने बैठक कर सड़क निर्माण का कार्य स्वयं करने का निर्णय लिया. गोविंदा राव ने जिला कलेक्टर से अपील की कि वे अपने गांव का दौरा करें. आदिवासी लोगों को डोली में बीमारों को ले जाने की परेशानी से बचाने के लिए सड़क को जल्द पूरा करने का आदेश दें.

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