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आंध्रप्रदेश: तो इन जिलों के आदिवासी हो जाएंगे बेघर

Posted on January 6, 2023 - 12:16 pm by

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (CPI-M) ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं पर ट्रू-अप शुल्क, स्मार्ट और प्रीपेड शुल्क लगाने का अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो ‘सत्ता आंदोलन’ शुरू किया जाएगा.

गुरुवार को विजयवाड़ा में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए माकपा के राज्य सचिव वी. श्रीनिवास राव ने कहा कि कृषि भूमि के लिए पंप सेट के लिए स्मार्ट मीटर लगाने से लोगों पर बोझ पड़ेगा.

उपभोक्ताओं पर पड़ेगा बोझ

श्रीनिवास ने कहा, “सरकार का कहना है कि मीटर केवल 200 यूनिट खपत करने वालों के लिए तय किए जाएंगे। और प्रत्येक मीटर की कीमत ₹13,000 से ₹14,000 के बीच है. इससे उपभोक्ताओं पर 10,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. स्मार्ट मीटर से न तो उपभोक्ताओं को फायदा होता है और न ही डिस्कॉम को. अंत में केवल अडानी और अंबानी समूह लाभांवित होंगे जो विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम चलाते हैं.”

नियामक आयोग के बिना मंजूरी के मीटर खरीदना गलत

कानून के अनुसार, राज्य सरकार को आंध्र प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (एपीईआरसी) की मंजूरी के बिना मीटर नहीं खरीदना चाहिए. लेकिन, सरकार ने आगे बढ़कर मीटर खरीद लिए.

उन्होने कहा कि एपीईआरसी को खर्च का एक नोट बनाना चाहिए और एक जांच करनी चाहिए,  प्रयास एनर्जी ग्रुप ने श्रीकाकुलम जिले में लगाए गए मीटरों की जांच की. सरकार को रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए.”

आदिवासी हो जाएंगे बेघर

श्रीनिवास ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद हरिता एनर्जी के नाम पर अडानी समूह को 75,000 एकड़ जमीन सौंपी. यदि प्रस्ताव को लागू किया गया तो मान्यम और अल्लूरी जिलों के आदिवासी बेघर हो जाएंगे. हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह अडानी समूह को जमीन न सौंपने की योजना पर फिर से विचार करे. माकपा के राज्य सचिवालय सदस्य चौ. बाबू राव भी मौजूद थे.

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