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आंध्र प्रदेश: ST सूची में इन जातियों को शामिल करने पर हो रहा है विरोध

Posted on December 6, 2022 - 1:36 pm by

आंध्रप्रदेश में अन्य जातियों को ST सूची में शामिल करने को लेकर विरोध हो रहा है. जी.ओ. नं. 52 में बोया और बाल्मीकी समुदाय को शामिल किया गया है. इसको लेकर अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों ने अखिल भारतीय अनुसूचित जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ के बैनर पर धरना देकर 5 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन किया गया. यह प्रदर्शन जीवीएमसी के पास गांधी प्रतिमा पर शासनादेश संख्या 52 (G.O. 52) को निरस्त करने को लेकर थी.

इस प्रदर्शन में एसटी कर्मचारियों, छात्रों, महिलाओं और सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया. अखिल भारतीय अनुसूचित जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ (All India Scheduled Tribe Employees Welfare Association) के राज्य अध्यक्ष भनोथु चक्री नायक ने कहा कि अगर केंद्र या राज्य सरकार ने बोया, वाल्मीकि या अन्य जातियों को एसटी सूची में शामिल करने या आदिवासी अधिनियमों के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की तो एसटी कर्मचारी लंबे समय तक संघर्ष शुरू करने के लिए तैयार हैं.

उन्होंने एसटी सूची में दो जातियों को शामिल करने के राज्य सरकार के कदम का विरोध करने के लिए सभी आदिवासी लोगों के बीच एकता का आह्वान किया. आगे कहा कि एसटी सूची में अन्य बीसी जातियों को शामिल करना एसटी के हितों के लिए हानिकारक है. कॉर्पोरेट समूहों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को खनन के लिए जंगलों को सौंपने के कारण आदिवासी लोग पहले से ही दयनीय जीवन जी रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर सब कुछ बिकाऊ बना रही हैं.

नायक ने कहा कि परियोजनाओं और निर्माणों के कारण आदिवासियों को उनके घरों से विस्थापित किया जा रहा है और उनकी आजीविका से वंचित किया जा रहा है. उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले विभिन्न आदिवासी संघों और संगठनों से आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए संयुक्त संघर्ष छेड़ने का आह्वान किया.

एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वेगड़ा तिरुपति राव, गिरिजन संघम के अध्यक्ष एस. दामोदरम, एसोसिएशन के नेता कोराबू सत्यनारायण, रूडा सत्य राव, दिप्पला संबमूर्ति और महिला प्रतिनिधि गीता उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया.

बता दें कि इसी तरह का विरोध झारखंड में बीसी जाति कुड़मी और जम्मू कश्मीर में पहाड़ी और ब्राह्मण समुदायों को एसटी लिस्ट में शामिल किए जाने को लेकर विरोध हो रहा है.

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