Skip to main content

वनाधिकार पट्टा पर अर्जुन मुंडा का जवाब, जानिए देश भर में कितने मामले हुए स्वीकार और कितने हुए रिजेक्ट

Posted on December 16, 2022 - 2:02 pm by

विजय उरांव

“सरकार आदिवासियों और आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है. भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार वास्तव में पिछली कांग्रेस सरकारों की त्रुटियों को सुधार रही थी. जिनके शासन में औद्योगिक क्रांति की आड़ में आदिवासियों की भूमि छीन ली गई थी. सरकार वन भूमि पर अधिक से अधिक सामुदायिक भूमि दावों को प्रदान करने और तेजी लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.” उक्त बातें केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में कही.

उन्होनें आगे कहा कि वनाधिकार में हमारा अधिक बल है, अधिक कोशिश कर रहे हैं कि उसको इकोनोमी के साथ कैसे जोड़ा जाए. वन और वन प्रबंधन के साथ वनोपज की सही व्यवस्था करते हुए एक आम जंगल में बसे हुए नागरिक आत्मनिर्भर बने. वहां के जो संसाधन है उसका उपयोग करते हुए. इसके अलावे ट्राईफेड के माध्यम से वनोपज को अंतराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की कोशिश है.

आदिवासी मामलों के मंत्रालय के अनुसार 1 जुलाई 2022 तक वर्ष 2006 में बने वनाधिकार कानून में से आदिवासियों और अन्य परंपरागत वनवासियों के द्वारा अब तक पूरे भारत में 4446 हजार पट्टा का दावा किया गया था. जिसमें सामुदायिक वनाधिकार (Community Forest Right Aka CFR) की संख्या 169,260 है. वहीं व्यक्तिगत वनाधिकार(Individual Forest Right aka IFR) की संख्या 4,276,844 शामिल है.

आंकड़ा-1, व्यक्तिगत वनाधिकार दावा और वितरण की स्थिति/जनजातीय कार्य मंत्रालय के वेबसाईट से

इसमें से 2,236 हजार पट्टा (2,235,845) पूरे भारत में वितरण किया गया. जो कि दावा किए गए कुल पट्टों का 50 फीसदी है. इसमें 102,585 सामुदायिक वनाधिकार और 2,133,260 व्यक्तिगत वनाधिकार शामिल है. इसमें से 5,364,16 दावे कई स्तरों पर लंबित है. जो कि कुल दावों में 12 फीसद है. तथा 1,673,843 दावों को अस्वीकृत कर दिया गया है. जिसकी संख्या 38 फीसदी है.

 इसके अलावा पूरे भारत में 160.31 लाख एकड़ वन भूमि को मान्यता (Forest land Recognized) मिली है. जिसमें सामुदायिक वनाधिकार वनभूमि 11,482,521 और व्यक्तिगत वनाधिकार वनभूमि 4,548,119 है.

देश के विभिन्न राज्यों में व्यक्तिगत वनाधिकार का दावा और टाईटल वितरण किया गया है तथा सामुदायिक वनाधिकार दावा और पट्टा वितरण किया गया. वो निम्नलिखित है.

राज्यों में सामुदायिक तथा व्यक्तिगत दावों की स्थिति

आंकड़ा-2,सामुदायिक वनाधिकार दावा और वितरण की स्थिति/जनजातीय कार्य मंत्रालय के वेबसाईट से

कितना दावा

व्यक्तिगत व सामुदायिक : छत्तीसगढ़ (871 हजार व 51 हजार), ओड़िशा(628 हजार व 15 हजार), मध्यप्रदेश(585 हजार व 42 हजार), महाराष्ट्र(363 व 12 हजार), कर्नाटक(288 हजार व 6 हजार), आंध्रप्रदेश(274 हजार व 3 हजार), तेलंगाना(204 हजार व 3 हजार) और त्रिपूरा(201 व 0),  गुजरात(183 हजार व 7 हजार), असम (149 हजार व 6 हजार), प. बंगाल (132 हजार व 10 हजार), झारखंड (107 हजार व 4 हजार), राजस्थान (97 हजार व 2 हजार), उत्तर प्रदेश (93 हजार व 1 हजार), केरल (43 हजार व 1 हजार), तमिलनाडु (34 हजार व 1 हजार)

कितना मिला

व्यक्तिगत व सामुदायिक : छत्तीसगढ़ (446 हजार व 46 हजार), ओड़िशा(452 हजार व 8 हजार), मध्यप्रदेश(267 हजार व 28 हजार), महाराष्ट्र(165 व 7 हजार), कर्नाटक(15 हजार व 1 हजार), आंध्रप्रदेश(211 हजार व 2 हजार), तेलंगाना(97 हजार व 0 हजार) और त्रिपूरा(128 व 0),  गुजरात(92 हजार व 5 हजार), असम (57 हजार व 1 हजार), प. बंगाल (44 हजार व 1 हजार), झारखंड (60 हजार व 2 हजार), राजस्थान (45 हजार व 0 हजार), उत्तर प्रदेश (18 हजार व 1 हजार), केरल (27 हजार व 0 हजार), तमिलनाडु (0 हजार व 0 हजार)

इन राज्यों में दावा करने पर पट्टा नहीं मिला :  गोवा (10 हजार), बिहार (8 हजार), उत्तराखंड (4), हिमाचल प्रदेश (3). हालांकि इन राज्यों में सामुहिक पट्टों को लेकर कोई दावा नहीं किया गया था.

इन राज्यों में कोई दावा नहीं किया गया : अंडमान व निकोबार

No Comments yet!

Your Email address will not be published.