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सेना दिवस विशेष: भारतीय सेना की पहली महिला जवान सैपर शांति तिग्गा की कहानी

Posted on January 15, 2023 - 6:01 am by

विजय उरांव, ट्राइबल खबर

कई क्षेत्र है जिसमे माना जाता रहा था कि यह सिर्फ पुरुषों का काम है और उसे महिलाएं नहीं कर सकती है. भारतीय सेना भी इसमें से एक है. इसी धारणा को तोड़ते हुए भारतीय सेना में पहली बार महिला जवान को शामिल किया गया. पहली बार महिला जवान के तौर पर शामिल होने वाली पहली महिला सैपर शांति तिग्गा थी. जो कि उस समय 35 वर्ष की थी और दो बच्चों की माँ थी.

पहली महिला जवान सैपर शांति तिग्गा पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी की रहने वाली थी, उनका जन्म 1976 में हुआ. वह उरांव आदिवासी परिवार से संबंध रखती थी. उनका बचपन एक कठिन दौर से गुजरा व कम उम्र में ही शादी करा दिया गया था. जिससे उन दोनों को दो संतानें प्राप्त हुई, लेकिन यह खुशी अधिक दिनों तक नहीं चली और वर्ष 2005 में उसके पति की मृत्यु हो गई. सैपर शांति तिग्गा को अनुकंपा के आधार पर रेलवे में पाइंटस् मैन की नौकरी मिल गई. पांच साल नौकरी के बाद उन्हें भारतीय सेना में जाने का मौका मिला.

शांति तिग्गा बचपन से ही सेना में जाना चाहती थी, क्योंकि उसके रिश्तेदार पहले से ही सेना में थे. साल 2010 में टेरिटोरियल आर्मी के बारे में जानने के बाद शांति ने 969 रेलवे इंजीनियर रेजीमेंट टेरिटोरियल आर्मी के लिए साइनअप किया और 35 वर्ष की आयु में भारतीय सेना में भर्ती हो गईं. आफिसर रैंक से नीचे के पोस्ट पर पहले किसी भी महिला को शामिल नही किया गया था.

ट्रेनिंग के दौरान सैपर शांति तिग्गा/deccanherald

सैपर शांति तिग्गा को रेलवे में पॉइंट-मैन के रूप में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के चलसा स्टेशन पर तैनात किया गया.

द हिंदू के अनुसार सेना के अधिकारी ने कहा था कि शारीरिक परीक्षणों में अपने पुरुष समकक्षों को पछाड़ते हुए 35 वर्षीय सैपर शांति तिग्गा प्रादेशिक सेना (टीए) के 969 रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट में शामिल हुईं. महिलाओं को केवल गैर-लड़ाकू इकाइयों में अधिकारियों के रूप में सशस्त्र बलों में शामिल होने की अनुमति है. लेकिन तिग्गा ने 1.3 मिलियन मजबूत रक्षा बलों में पहली महिला जवान होने का अनूठा गौरव अर्जित किया है.

वहीं शांति तिग्गा ने कहा था, “मेरे कुछ रिश्तेदार सशस्त्र बलों में थे और मैं हमेशा उनसे सेना का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित होता था. मैंने फिजिकल टेस्ट क्लियर करने के लिए कड़ी मेहनत की. मैं जानती हूं कि मैंने सेना की पहली महिला जवान बनकर अपने परिवार को गौरवान्वित किया है.

क्या है टेरिटोरियल आर्मी

टेरिटोरियल आर्मी का हिंदी अर्थ है प्रादेशिक सेना है, जो भारतीय सेना की ही एक ईकाई है. इसमें 18 से लेकर 42 साल की उम्र तक आम श्रमिक नागरिक से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक भर्ती हो सकते हैं. इसे सुरक्षा की सेकेंड लाइन भी कहा जाता है. भर्ती के बाद टेरिटोरियल आर्मी के जवानों को भी कुछ दिनों तक कड़े सैनिक प्रशिक्षण से गुज़रना पड़ता है. युद्ध के दौरान इन्हें फ्रंट लाइन सुरक्षा पर भी तैनात किया जाता है. हर टेरिटोरियल आर्मी के जवान को अपनी मर्ज़ी से साल के दो महीने सेना को समर्पित करने होते हैं.

राष्ट्रपति ने दिया था बेस्ट ट्रेनी का अवार्ड

शांति तिग्गा ने RTC (Recruitment Training Camp) में फाइरिंग प्रशिक्षक को भी प्रभावित कर दिया. अपने बंदूक चलाने की कला से शांति ने Marksman (निशानेबाज में सर्वोच्च स्थान) की पद्वी हासिल की. भारतीय रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2011-12 के अनुसार सैपर शांति तिग्गा ने 15 नवंबर 2010 में टेरिटोरियल आर्मी ज्वाइन की थी. 15 नवंबर से 15 दिसंबर 2010 तक शांति तिग्गा से भर्ती प्रशिक्षण लिया गया था. जिसमें सैपर शांति तिग्गा पहले स्थान पर रही. जिसके लिए उन्हें तत्कालिन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के द्वारा सर्वश्रेषठ प्रशिक्षु पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

राष्ट्पति प्रतिभा पाटिल के द्वारा सम्मानित सैपर शांति तिग्गा

एक दुखद व रहस्यमय अंत

साल 2013 के मई महिने में शांति तिग्गा की जिन्दगी ने एक अलग ही करवट ले ली. 9 मई 2013 को कुछ अपराधियों के द्वारा शांति का अपहरण किया गया, उसके बाद उन्हे देवपानी गांव में रेलवे ट्रैक के पास जख्मी हालत में पाया गया, जिसमें उसका शरीर पोल पर बंधा हुआ था और आंखों में सफेद पट्टी बांधी गई थी. उसे अलिपुर दुअर अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस जांच भी शुरू हुई, अस्पताल की सुरक्षा भी बढ़ाई गई. लेकिन फिर भी चार दिन बाद बाद 14 मई 2013 को उनका शव अस्पताल के ही शौचालय में लटका हुआ पाया गया.

रेलवे ट्रैक के पास बरामद शांति तिग्गा

फर्स्ट पोस्ट के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने इसे आत्महत्या बताया था, उनका कहना था कि पुलिस गार्ड शांति तिग्गा के केबिन के बाहर थे. वहीं केबिन के बाहर बैठे सैपर शांति जब काफी देर बाद भी शौचालय से बाहर नहीं निकली तो उसके बेटे ने शोर मचाया.

इसके बाद शांति के परिवार ने जांच की पुरजोर मांग की, लेकिन जांच में कोई सबुत नही मिलने कारण इस रहस्यमय मौत को रहस्य ही रहने दिया गया और केस बंद कर दिया गया.

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