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विधानसभा चुनाव 2023: क्या होगा आदिवासी मुख्यमंत्रियों का, कौन-कौन आजमा रहे हैं किस्मत, जानिये सबकुछ

Posted on January 17, 2023 - 5:02 pm by

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

भारत में साल 2023 के अंत तक कुल नौ राज्यों में चुनाव होने हैं. जिसमें तेलंगाना, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम, कर्नाटक, त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय शामिल है. वहीं पूर्वोत्तर के तीन राज्यों का विधानसभा कार्यकाल मार्च में खत्म हो रहा है. जिसको लेकर चुनाव की तैयारी भी पूरी हो चुकी है. मेघालय और नागालैंड 6वीं अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है. जिसके कारण यह राज्य पूरी तरह से जनजातीय शासित राज्यों में शामिल है. वहीं त्रिपुरा में भी आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग जोरों पर है. बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग 19 जनवरी को इन तीनों राज्यों में होने वाले चुनाव की घोषणा कर सकती है.

चुनावी मैदान में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यु रियो और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा अपना जोर दिखाने वाले हैं. बता दें कि इन तीनों राज्यों में विधानसभा सीटों की संख्या 60 ही है.

मेघालय में कॉनराड संगमा ने विधानसभा चुनाव के लिए 58 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. कॉनराड मेघालय में मुख्यमंत्री होने के साथ एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. वह अपने गढ़ की रक्षा के लिए ‘दक्षिण तुरा’ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे. कॉनराड संगमा मुख्यमंत्री रहने से पूर्व मेघालय के वित, पावर एवं टूरिज्म मंत्री (2008-09), लोकसभा सदस्य (19 मई 2016 – 27 अगस्त 2018), मेघालय के वितमंत्री के रूप में कार्य कर चुके है.

वहीं नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यु रियो ने अभी तक चुनाव से सबंधित उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. वह उत्तरी अंगामी-2 (कोहिमा) विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं. वर्ष 2013 में उन्होने NDF की ओर मुख्यमंत्री बने थे. वहीं 2018 में NDPP की ओर से मुख्यमंत्री बने. नेफ्यु रियो नागालैंड में चौथी बार मुख्यमंत्री बने थे.

सीटों का जोड़ घटाव

मेघालय – मेघालय में जनगणना 2011 के अनुसार वहां की आबादी 29.67 लाख है. जिसमें से 17.68 लाख मतदाता (2018 चुनाव के अनुसार, हालांकि 2023 के चुनाव में 50 हजार से अधिक मतदाताओं की संख्या बढ़ी है) हैं. जिसमें से 8.93 लाख महिला मतदाता हैं. मेघालय के 60 सीटों में से 55 सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है व 5 सामान्य सीट है. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 21 सीट, NPP को 20, UDP को 6 सीट, BJP को 2 सीट तथा अन्य पार्टियों को 11 सीटें प्राप्त हुई थी. वहीं साल 2013 की बात करें तो कांग्रेस को 29 सीट, स्वतंत्र उम्मीदवारों  को 13 सीट, UDP को 8 सीट तथा अन्य को 10 सीटें प्राप्त हुई थी.

साल 2018 में नेशनल पीपल्स पार्टी(NPP)  2 सीट से बढ़कर 20 पर पहुंच गई थी. जो कि NPP की मजबूत स्थिति को दर्शाती है. वहीं साल 2018 में कांग्रेस 29 सीटों से सीमित होकर 21 सीट पर रह गई.

नागालैंड – जनगणना 2011 के अनुसार नागालैंड की आबादी 19.78 लाख है. जिसमें 13,09,651 मतदाता हैं. यहां पर 60 में 59 सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में NPF(नागा पीपल्स फ्रंट) को 26 सीट, NDPP को 18, BJP को 12, NPP  को 2 सीट और अन्य पार्टी महज 2 सीट ही जीत पायी थी. नागा पीपल्स फ्रंट के 26 सीट जीतने के बावजूद भी वह सरकार नहीं बना पायी. NDPP और BJP के गठबंधन में सरकार बनी. जिसमें नेफ्यु को मुख्यमंत्री बनाया गया. वहीं साल 2013 में गठबंधन में NDF को 38 सीट और BJP को 1 सीट मिली थी. इसके अलावा कांग्रेस को 8 सीट, NCP को 4 व अन्य पार्टियों को 9 सीटें प्राप्त हुई थी.

त्रिपुरा – जनगणना 2011 के अनुसार त्रिपुरा की आबादी 36.74 लाख है. वहीं त्रिपुरा में आदिवासियों की आबादी 11.67 लाख है. आदिवासियों के लिए 60 में 20 सीट रिजर्व है और 10 सीट दलितो के लिए. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में BJP  को 36 सीट, CPM को 16, IPFT  को 8 मिली थी. इसमें भाजपा पहली बार बढ़त बनाते हुए 36 सीटें जीती थी. वहीं साल 2013 के विस चुनाव में CPM को अकेले 49 सीट मिली थी और कांग्रेस को 10 सीट व CPI को 1 सीट प्राप्त हुई थी.

वर्ष 2018 के चुनाव से पहले त्रिपुरा में सीपीएम पार्टी ने लगातार 25 साल तक सरकार चलाई थी. लेकिन 2018 के चुनाव में त्रिपुरा में इंडिजिनियस पिपुल्स फ़्रंट ऑफ़ त्रिपुरा  (IPFT) ने अलग टिपरालैंड की माँग उठाई. इस माँग के साथ आदिवासी नेता और संगठन दोनों बीजेपी के क़रीब आ गए. वर्ष 2018 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी के साथ IPFT का गठबंधन हुआ. इस गठबंधन ने राज्य में शानदार जीत हासिल की थी. अब त्रिपुरा में फिर से विधान सभा चुनाव होने है. लेकिन राज्य के राजनीतिक समीकरण भी पूरी तरह से बदल चुके हैं.

अब IPFT बिखर चुका है. प्रद्योत किशोर माणिक्य के नेतृत्व में टिपरा नामक एक और आदिवासी संगठन का उदय हुआ है. माणिक्य त्रिपुरा के राज परिवार से है. त्रिपुरा मोथा फिलहाल राज्य की राजनीति में सबसे मुखर राजनीतिक दल नज़र आ रहा है. विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में इस दल का आधार बहुत मज़बूत है.

वहीं मेघालय में कॉनराड संगमा एक मजबूत स्थिति में है, बिना गठबंधन के ही एनपीपी 58 सीटों के उम्मीदवारों की घोषना कर दी है. बता दें कि एनपीपी की स्थापना पीए संगमा ने की थी. यह पार्टी आदिवासी हितो को ध्यान में रखकर बनायी थी. वर्तमान में एनपीपी का कमान कॉनराड संगमा के हाथों में है. हालांकि कितना सफल हो सकता है यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा.

इसके अलावा नेफ्यु अलग-अलग पार्टी में रहते हुए भी मुख्यमंत्री की कमान संभाल चुके हैं.

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