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1857 से पहले आदिवासियों ने सेरेंगसिया में अंग्रेजो से लड़ी थी लड़ाई: अमित शाह

Posted on January 7, 2023 - 4:39 pm by

धरती आबा बिरसा मुंडा की धरती को जोहार करता हूं. इसी भूमि के बाबा तिलका मांझी, वीर तेलंगा खड़िया, शहीद बुधू भगत, सिद्धो कान्हु, गणपत राय, फुलो झानों जैसे आदिवासी नेताओं ने देश के लिए अपनी जान समर्पित की. कोल्हान क्षेत्र अनेक आंदोलनों का क्षेत्र रहा है, यहां अपने अधिकार का संघर्ष, अधिकार की मांग बहुत पुरानी रही है. जब 1857 की क्रांति की शुरूआत भी नहीं हुई थी, तब 19 नवंबर 1837 को सिरंगसिया घाटी में पोटो हो ने 400 अंग्रेजों की टुकड़ी के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया था. 1938 में पोटो हो, नारा हो, बुड़ाई हो को फांसी दी गई. उक्त बातें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने झारखंड के कोल्हान में कही. वे 2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे.

उन्होने कहा कि यहां के धरती में इतनी समृद्धि है कि पूरे देश की गरीबी मिटायी जा सकती है.

अवैध घुसपैठिये जनजाति बच्चियों से जबरन कर रहे है शादी

अमित शाह ने अवैध घुसपैठियों की बात उठाते हुए कहा कि अवैध घुसपैठिये जनजातीय बच्चियों के साथ जबरन शादी कर रहे हैं और उसके बाद में उनकी जमीन ऐंठ रहे हैं. सीएम हेंमत सोरेन को चेताते हुए कहा कि घुसपैठिए की हिमाकत को रोकिए. वर्ना झारखंड की जनता आपको माफ नहीं करेगी. वोटबैंक की लालच जनजाति की हित से बड़ी नहीं हो सकती. आपने आदिवासी होकर ये काम किया है.

आदिवासियों ने कभी हार नहीं माना

वहीं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी मामलों में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि कोल्हान की धरती वीरों की धरती है. भारत के वैसे सपूतों की धरती है जिस मिट्टी ने कभी हार नहीं माना. मुगलों का शासन हो, ब्रिटिश की हुकूमत हो कोल्हान विद्रोह करता रहा, अपने मिट्टी और स्वाभिमान के लिए लड़ाई लड़ता रहा और अपने परंपरागत जीवन पद्दति के साथ कभी समझौता नहीं किया.

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