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बिहार: लोहार को नहीं मिलेगा अनुसूचित जनजाति का लाभ

Posted on March 21, 2023 - 5:35 pm by

2021 के रिट याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लोहरा अनुसूचित जनजाति है और लोहार अनुसूचित जनजाति नहीं है, इसलिए विवादित अधिसूचना को रद्द कर दिया गया था. इससे लोहरा जनजाति के लोग प्रभावित नहीं होंगे, पहले के जैसे ही लाभ प्राप्त कर सकेंगे. जनजातीय कार्य राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडू ने लोकसभा के एक जवाब में कहा.

बता दें कि एसटी आदेश(संशोधन) अधिनियम, 1976 के अनुसार लोहारा या लोहरा को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया गया है. जिसको हिंदी में लोहार या लोहरा के रूप में दर्ज किया गया है.

जनजाति मंत्रालय के अनुसार लोहार को पिछड़ा श्रेणी में रखा गया है, लेकिन अंग्रेजी में गलती होने के कारण लोहार अनुसूचित जनजाति होने का दावा कर रहे थे और लाभ उठा रहे थे. इसलिए उन्हें अनुसूचित जनजाति के रूप में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है.

वर्ष 2006 में संशोधित कर लोहार से लोहारा को सुधारा गया है. पूछे गए सवाल में नालन्दा से सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने लोहार व लोहरा से संबंधित पेचादा होने के मामले को लेकर पूछा था.

जनजाति मामलों में मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, “हम विवादित अधिसूचना को रद्द करते हैं. हम देख सकते हैं कि विवादित अधिसूचना में निर्देश ‘लोहारा’ (लोहार) समुदाय को प्रमाण पत्र देने का है. जबकि लोहारा अनुसूचित जनजाति का सदस्य है, लोहार नहीं है. इसलिए, इस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, इसका अर्थ यह नहीं समझा जाना चाहिए कि ‘लोहारा’ जो पहले से ही अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल है, इस फैसले से प्रभावित होगा. हम स्पष्ट करते हैं कि विवादित अधिसूचना को रद्द करना ‘लोहार’ समुदाय के रूप मे होगा और लोहारा अधिनियमों द्वारा संशोधित राष्ट्रपति के आदेश के तहत उनके लिए प्रदान किया गया लाभ प्राप्त करना जारी रखेंगे.”

2021 रिट याचिका (सिविल) संख्या 1052, सुप्रीम कोर्ट

अप्रैल 2022 में लोहार को जनजाति श्रेणी से हटा दिया गया था.

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