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गतिरोध के कारण पेश नहीं हुआ बिल, हाटी को ST दर्जा मिलने में लगेगा समय

Posted on April 8, 2023 - 5:01 pm by

राज्यसभा में चल रहे गतिरोद के कारण अनुसूचित जनजाति संशोधन विधेयक पेश नहीं हो सका. हिमाचल प्रदेश के गिरिपार क्षेत्र के लोगों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा पाने के लिए अभी कुछ और समय का इंतजार करना होगा.

बता दें राज्यसभा सत्र के आखिरी दिन भी सदन में गतिरोध जारी रहा, जिसके चलते यह अहम विधेयक राज्यसभा में पेश नहीं हो सका. ऐसे में लोगों का इंतजार और बढ़ गया है.

हाटी कमेटी की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष अमीचंद कमल ने इस मामले को लेकर अपनी स्पष्टता जाहिर की है, उन्होने कहा कि हालांकि आदिवासी मामलों में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के सार्थक प्रयास और तमाम एहसानों के बावजूद अब हमें संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के लिए और इंतजार करना होगा.

इसको लेकर 28 मार्च को सांसद सुरेश कश्यप व पूर्व विधायक बलदेव सिंह तोमर के नेतृत्व में केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा व आदिवासी राज्य मंत्री रेणुका सिंह के साथ बैठक हुई. हाटी समिति के पदाधिकारियों को बैठक में स्पष्ट आश्वासन मिला कि यह विधेयक अवश्य पारित होगा.

राज्यसभा में हाटी मुद्दे पर चर्चा के लिए तथ्यात्मक जानकारी भी उपलब्ध कराई गई थी और हाटी समिति भी लगातार संपर्क में थी, लेकिन संसद सत्र का गतिरोध आज आखिरी दिन भी बना रहा.

लोकसभा ने 16 दिसंबर को एक संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी. जिसमें हिमाचल प्रदेश के हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की श्रेणी में शामिल करने का प्रावधान किया गया है. निचले सदन में संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक, 2022 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि यह विधेयक हिमाचल प्रदेश के उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए लाया गया है, जो वर्षों से सुदूर, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के साथ रहते आये हैं.

कौन है हिमाचल प्रदेश के हाटी?

हाटी समुदाय के लोग वो हैं, जो कस्बों में ‘हाट’ नाम के छोटे बाजारों में सब्जियां, फसल, मांस या ऊन आदि बेचने का परंपरागत काम करते हैं. हाटी समुदाय के पुरुष आम तौर पर एक सफेद टोपी पहनते हैं. ये समुदाय हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गिरी और टोंस नदी के बसे हुए हैं और जौनसार बावर क्षेत्र में भी इनका विस्तार है. ये एक वक्त कभी सिरमौर शाही संपत्ति का हिस्सा थे.

हिमाचल के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय और उत्तराखंड के जौनसार बावर के जौनसारी समुदाय में सामाजिक, सांस्कृतिक के साथ ही भौगोलिक समानता भी है. जौनसार बावर क्षेत्र को 1968 में ही जनजाति का दर्जा मिल चुका है. जबकि गिरीपार क्षेत्र को जनजाति क्षेत्र और भाटी समुदाय को जनजाति समुदाय घोषित करने की मांग तबसे चल रही है. जो लोग हिमाचल में रहे, उन्हें समान दर्जा या लाभ नहीं दिया गया.

अब टोपोग्राफी से जुड़ी दिक्कतों की वजह से कामरौ, संगरा और शिलिया क्षेत्रों में रह रहे इस समुदाय के लोग पढ़ाई और रोजगार की दिक्कतों का सामना करते रहते हैं. जिस तरह हरियाणा में खाप होती है, वैसे ही हाटी समुदाय में खुंबली नाम की पारंपरिक परिषद होती है, जो इससे जुड़े मामलों को देखती है. अभी सिरमौर जिले में काफी हाटी समुदाय के लोग रहते हैं.

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