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बीजद ने तीन आदिवासी भाषाओं को  आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की

Posted on December 10, 2022 - 1:32 pm by

बीजू जनता दल (BJD) ने 9 अक्टूबर को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में ओडिशा में बोली जाने वाली तीन आदिवासी भाषाओं को शामिल करने की मांग की.

राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए बीजद सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने केंद्र सरकार से हो, मुंडारी और भूमिज भाषाओं को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा.

बीजद सांसद ने कहा कि जातीय पहचान के रूप में भाषा अत्यंत महत्वपूर्ण है. 22.85 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जनजाति की आबादी के साथ, ओडिशा 62 आदिवासी समुदायों का घर है, जिसमें 13 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) शामिल हैं, पात्रा ने सदन को सूचित किया.

उन्होंने कहा, “हो, मुंडारी और भूमिज भाषाओं को शामिल करने से ओडिशा में इन तीन भाषाओं को बोलने वाले आदिवासी समुदायों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी.”

ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने गृह मंत्रालय को इसके संबंध में पहले ही पत्र लिख चुके हैं. इन भाषाओं को ओडिशा और झारखंड में 10 लाख लोगों के द्वारा बोली जाती है. संथाली (आठवीं अनुसूची में शामिल) के बाद हो भाषा ओडिशा में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है. वहीं मुंडा आदिवासियों के द्वारा मुंडारी 6 लाख लोगों के द्वारा बोली जाती है. इसके अलावा भूमिज 3 लाख से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है. ओडिशा सरकार ने इन भाषाओं को पहचान दिलाने के लिए कई काम किए हैं.

पात्रा ने कहा, “मैं केंद्र सरकार से इन भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग करता हूं”  

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