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त्रिपुरा चुनाव 2023: बीजेपी आदिवासी लोगों के विकास में विश्वास करती है-हिमंत बिस्वा सरमा

Posted on January 31, 2023 - 11:43 am by

भाजपा आदिवासी लोगों के विकास में विश्वास करती है, लेकिन पार्टी त्रिपुरा की एकता और अखंडता से समझौता नहीं कर सकती है. उक्त बातों असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कही. सरमा और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा के नामांकन दाखिल करने में शामिल हुए. साहा ने बोरडोवली सीट से नामांकन दाखिल किया.

सरमा ने कहा कि त्रिपुरा में माहौल उत्सव का है और हम जीत दर्ज करेंगे. हम पिछली बार की तुलना में अपने टैली में सुधार करेंगे. टिपरा एक कारक होगा क्योंकि वे चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन मुझे नहीं लगता कि चुनावी तौर पर उन्हें ज्यादा फायदा होगा.

त्रिपुरा के विभाजन में बीजेपी की सहमति नहीं

नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) के संयोजक सरमा ने कहा कि हम हमेशा आदिवासी पार्टियों के साथ गठबंधन करना चाहते हैं. हालांकि साथ ही हमें राज्य की एकता और अखंडता की रक्षा करनी होगी. हम इस बात से सहमत नहीं हो सकते कि त्रिपुरा को दो राज्यों में विभाजित किया जाएगा.

उन्होंने आगे कहा कि हम हमेशा आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाना चाहते है, हम आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण के लिए हैं, लेकिन साथ ही हम त्रिपुरा की एकता और अखंडता को भंग नहीं कर सकते. यह हमारी विचारधारा है, हम किसी ऐसे व्यक्ति को बढ़ावा नहीं दे सकते जो त्रिपुरा को विभाजित करना चाहता है.

बता दें कि हाल ही में तिपराहा इंडिजिनियस प्रोग्रेसिव रिजनल अलाएंस (टिपरा) और भाजपा गठबंधन की चर्चा में लगे थे. टिपरा के नेतृत्व वाले सुप्रीमो प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मन ने भारत सरकार से अलग राज्य की लिखित मांग की थी. इसको लेकर उन्होंने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की थी.

राज्य में भाजपा का कोई विरोधी नहीं

राज्य में भाजपा का कोई विरोधी नहीं है. यह कहते हुए सरमा ने कहा कि राज्य में भाजपा का कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है, हालांकि सीट के हिसाब से विरोधी होंगे. कांग्रेस देश के राजनीतिक परिदृश्य का प्रतिनिधित्व नहीं करती, सीपीआईएम तो है ही नहीं. लोग सीपीआईएम कांग्रेस सीट बंटवारे पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे, मुझे नहीं पता लेकिन हमारे लिए वे एक प्रासंगिक कारक नहीं हैं. कांग्रेस जीरो है और CPIM एक और जीरो है इसलिए दो जीरो को मिलाने से शायद ही कोई फर्क पड़ता है.

बीजेपी 55 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और उसकी सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) पांच सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

टिपरा  ने वर्ष 2021 में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद चुनाव जीता. इस परिषद के नियंत्रण के दायरे में त्रिपुरा के 10,491 वर्ग किमी क्षेत्र में लगभग 1.2 मिलियन लोगों की आबादी का दो-तिहाई हिस्सा शामिल है, जिनमें से 90% आदिवासी हैं. इसमें 20 विधानसभा सीटें आती हैं. टिपरा पार्टी ग्रेटर टिपरालैंड के संवैधानिक समाधान के लिए मांग कर रही है.

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