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औपनिवेशिक शासन की तरह आदिवासियों के अधिकारों से वंचित कर रही बीआरएस सरकार: कांग्रेस नेता

Posted on March 20, 2023 - 11:40 am by

कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता भट्टी विक्रमार्क ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार पर आरोप लगाया है, उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनके वन संसाधनों के अधिकार से वंचित करने के लिए औपनिवेशिक शासन की तरह काम कर रही है.

भट्टी ने अपनी ‘जनता मार्च’ पदयात्रा के तहत पुलिमाडुगु और खानपुर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र के अन्य क्षेत्रों में ग्रामीणों से मुलाकात की. रविवार को यह उनका चौथा दिन था. पुलिमदुगु गांव की महिलाओं ने उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया. जिसमें उन्होंने बताया कि 2बीएचके घर नहीं मिला, 57 से 65 साल के लोगों के लिए आसरा पेंशन, सरकारी नौकरी और कई घरों में शौचालय भी नहीं है.

वहीं इंद्रवेली की आदिवासी महिलाओं ने भट्टी को बताया कि अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगने के कारण उन्हें जंगल से मिट्टी और जलाऊ लकड़ी लाने में समस्या हो रही है.

इस पर भट्टी ने आदिवासियों को घड़े बनाने या पीने का पानी निकालने, जलाऊ लकड़ी लेने या यहाँ तक कि बोरवेल खोदने के लिए जंगल से मिट्टी नहीं लेने देने के लिए अधिकारियों की भर्त्सना की.

भट्टी ने कहा कि बीआरएस सरकार ऐसे काम कर रही है जैसे कि वह किसी दूसरे देश की सरकार हो और लोगों के खिलाफ जन्नाराम में मछली पकड़ने के मामले दर्ज किए गए हों. क्या यह ब्रिटिश, फ्रांसीसी या पुर्तगाल या तेलंगाना सरकार है?

सीएलपी नेता ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि अगर कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए वोट दिया जाता है तो वह उनकी सभी समस्याओं में शामिल होगी, इंदिरम्मा को घर देगी और सभी कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार करेगी.

बीआरएस सरकार की 42,000 करोड़ की ‘मिशन भागीरथ’ परियोजना एक घोटाला है क्योंकि बड़ी संख्या में घरों को परियोजना से आपूर्ति नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा कि दसनापुर और अंदुगोडा में लोग मैन्युअल रूप से कुओं से पानी खींच रहे हैं.

बता दें कि तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति सरकार में मिशन भागीरथ योजना राज्य के सभी गांव और शहरों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया प्रोजेक्ट है. इस योजना में गोदावरी और कृष्णा नदियों के द्वारा राज्य के प्रत्येक घर तक पीने का पानी पहुंचाया जाता है. इसकी शुरूआत मेडक जिले से किया गया था.

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