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केंद्र का उद्देश्य आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाना है: प्रधान

Posted on December 21, 2022 - 11:57 am by

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने  21 दिसंबर को दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है. केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र का उद्देश्य आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाना है.

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आदिवासी समुदायों के मुद्दों को समझने के लिए वर्ष 1999 में  तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय मामलों का गठन किया था. वर्तमान में केंद्रीय प्रायोजकों की योजनाओं में 2014-15 में लगभग 19,437 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. वहीं वित्त वर्ष 2014-15 से 2022-23 तक आवंटन 91,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सराहना करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया कि आदिवासी समुदाय में शिक्षा एक प्रमुख बदलाव का बिंदु है. उन्होंने आगे कहा, “मैं इसे देश की उपलब्धि मानता हूं कि ओडिशा के एक सुदूर गांव से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शिक्षा, भारत के लोकतंत्र और प्रधानमंत्री की नीतियों के कारण सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचीं.”

लोकसभा सांसद कई और आदिवासी समुदायों ने आरक्षण की मांग की है

इस महीने की शुरुआत में  विभिन्न दलों के लोकसभा सदस्यों ने अपने क्षेत्रों के आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षण की मांग की.  एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने कोटा के एक एकीकृत बिल की आवश्यकता पर बल दिया था.  संशोधन के द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसूचित जनजाति माने जाने वाले आदिवासी समुदायों को सूचीबद्ध किया गया है. विधेयक में हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की सूची में सिरमौर जिले के ट्रांस गिरि क्षेत्र के हट्टी समुदाय को शामिल किया गया है. इसके अलावा कर्नाटक के बेट्टा कुरूबा और काडू कुरूबा, उत्तर प्रदेश में एससी में शामिल गोंड आदिवासियों को एसटी में शामिल किया गया है.

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