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छत्तीसगढ़: आदिवासी नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित को बीस वर्ष कारावास

Posted on February 7, 2023 - 3:44 pm by

छत्तीसगढ़ अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट (पाक्सो एक्ट) पूजा जायसवाल के न्यायालय ने आदिवासी किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के आरोपित को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई है. आरोपित ने किशोरी को अंबिकापुर के किराए के मकान में 20 दिनों तक साथ रखा था. न्यायालय ने पीड़िता को चार लाख हर्जाना की राशि दिए जाने का भी निर्देश दिया है.

क्या है पूरा मामला

अतिरिक्त लोक अभियोजक राकेश सिन्हा के अनुसार दरिमा थाना क्षेत्र के एक गांव की आदिवासी किशोरी को ग्राम झींगों राजपुर निवासी आरोपित अमर प्रजापति (29) भगा ले गया था. घटना के दिन पीड़िता के पिता घर पर नहीं थे. किराना दुकान जाने के नाम पर पीड़िता घर से निकली थी. आरोपित ने बीते 28 मई 2018 से लेकर 18 जून 2018 तक आदिवासी किशोरी को अंबिकापुर शहर में स्थित किराए के मकान में रखा था. यहीं से पुलिस ने आदिवासी किशोरी को बरामद किया था. पुलिस पूछताछ में पीड़िता ने आरोपित द्वारा दुष्कर्म किए जाने की जानकारी दी थी. इसी आधार पर आरोपित के विरुद्ध अपहरण, दुष्कर्म तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था.

इन धाराओं पर आरोपित को सजा मिली

पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय के निर्देश पर जेल भेज दिया था. प्रकरण के सारे तथ्यों की सुनवाई और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट (पाक्सो एक्ट) पूजा जायसवाल के न्यायालय ने आरोपित को धारा 363, 366, धारा 376 (2)(ढ)तथा धारा 376 (3) का दोषी पाया. सोमवार को इस मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया. न्यायालय ने अलग-अलग धाराओं के लिए आरोपित को क्रमशः तीन वर्ष,पांच वर्ष, 10 वर्ष, 24 वर्ष की सजा सुनाई. साथ ही अर्थदंड की सजा भी दी गई है. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी लेकिन अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर सभी धाराओं के तहत पृथक- पृथक कारावास भुगतना होगा.

आदिवासी किशोरी को कब्जे में रखकर दुष्कर्म करने के इस मामले में न्यायालय ने पीड़िता को चार लाख प्रतिकर की राशि दिए जाने का भी निर्देश दिया है. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जिला दंडाधिकारी सरगुजा को पीड़िता को प्रतिकार की राशि दिलाए जाने के आदेश दिए गए हैं.

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