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छत्तीसगढ़: आदिवासियों का एक और पहाड़ खतरे में, गांव के आदिवासी दे रहे धरना

Posted on January 16, 2023 - 6:01 pm by

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला मुख्यालय के ओरछा मार्ग में स्थित ग्राम पंचायत बड़गांव के आश्रित ग्राम लसुनपदर में कई गांव के लोग अपने पांरपरिक हथियार के बड़गांव पहाड़ी को बचाने के लिए 10 दिनों से धरना दे रहे हैं. आंदोलन को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं अपने छोटे बच्चों को लेकर कड़ाके के ठंड में रात बिता रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होती है, तब तक आंदोलन चलता रहेगा.

पहाड़ी में है देवी देवताओं का वास

ग्रामीण आदिवासियों का कहना है कि ”उन्हें खबर मिली है कि बड़गांव पहाड़ी को शासन ने किसी निजी कंपनी को लीज पर दे दिया है. बहुत जल्द पहाड़ी से लौह अयस्क खनन का कार्य शुरू हो जाएगा. लौह अयस्क खनन शुरू होने से हमारे गांव में पुलिस कैम्प भी स्थापित कर दिया जाएगा. जिससे ग्रामीणों को परेशानी होगी.जल जंगल जमीन में हम आदिवासियों का अधिकार है. जिसे सरकार हमारी अनुमति के बिना निजी कंपनी को दे रही है. पहाड़ी में हमारे पुरखों के देवी-देवताओं का वास है.”

बड़गांव पहाड़ी पर लौह अयस्क की पुष्टि

बड़गांव पहाड़ी में लौह अयस्क का भण्डार मौजूद होने की बात कही जा रही है. पिछले कुछ महिनों से छोटेडोंगर क्षेत्र में बड़गांव पहाड़ी में लौह खनन शुरू होने की खबर काफी चर्चा में है. जिसकी भनक ग्रामीणों को भी लग जाने के बाद सैकड़ों ग्रामीण कड़कती ठंड में राशन पानी लेकर लसुनपदर पहाड़ी के पास ही धरने पर बैठ गए हैं. आदिवासी ग्रामसभा अनुमति के बगैर खदान खोलना बंद करो. पेसा कानून पांचवीं, छठवीं अनुसूची को अमल करो, कैम्प सड़क विस्तार करना बंद करो जैसे नारों से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं.

आदिवासियों ने विरोध को लेकर तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

ग्रामीण आंदोलन करते हुए

पिछले 10 दिनों से बड़गांव पहाड़ी को बचाने के लिए आंदोलन पर बैठे ग्रामीणों से मिलने के लिए छोटेडोंगर तहसीलदार पहुंचे. इस दौरान तहसीलदार ने आंदोलनकारियों से लगभग एक घंटे चर्चा की. चर्चा के बाद ग्रामीणों ने तहसीलदार को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है. आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी अपने छोटे छोटे बच्चों को लेकर कड़ाके की ठंड में रात बिता रहीं हैं. जिसके कारण स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.

जिले में संचालित हैं दो खदानें

नारायणपुर जिले में वर्तमान में दो खदानों में कार्य प्रगति पर है. जिसमें एक रावघाट खदान जिसकी देखरेख बीएसपी कर रही है, तो दूसरा छोटेडोंगर में आमदाई खदान है जिसका देखरेख निको जायसवाल की कंपनी कर रही है. इन दोनों खदानों का भी ग्रामीणों ने विरोध किया था. लेकिन बाद में ग्रामीणों को मनाकर खनन कार्य शुरु किया गया. लेकिन अब एक बार फिर बड़गांव पहाड़ी को लेकर ग्रामीण लामबंद हुए हैं. ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि पहाड़ों को खत्म कर देने से उनके रीति रिवाज प्रभावित होते हैं.

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