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छत्तीसगढ़: ईसाई आदिवासी महासभा द्वारा प्रस्तावित नृत्य महोत्सव स्थगित

Posted on November 8, 2022 - 11:56 am by

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में ईसाई आदिवासी महासभा छत्तीसगढ़ के उरांव नृत्य महोत्सव की अनुमति को प्रशासन ने स्थगित कर दिया है. यह आयोजन आज आठ नवंबर (आज) को अंबिकापुर के पीजी कालेज मैदान में प्रस्तावित था. प्रशासन द्वारा सुरक्षा को देखते हुए कार्यक्रम को स्थगित करने का आदेश जारी किया था. उसके बाद सोमवार को ईसाई आदिवासी महासभा से जुड़े लोग परंपरागत वेशभूषा और नृत्य करते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे थे. यहां एसडीएम प्रदीप साहू व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला से मुलाकात की. ईसाई आदिवासी महासभा ने दो अलग-अलग ज्ञापन एसडीएम को सौंपा.

कार्यक्रम निरस्त नहीं हुआ है

महासभा ने प्रशासन पर स्थगित करने को मौलिक अधिकारों का हनन करार दिया. आयोजन की अनुमति के लिए जिला प्रशासन को आदेशित करने के लिए मुख्यमंत्री से मांग की है एसडीएम बताया कि यह कार्यक्रम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में एक नया विश्व रिकार्ड बनाए जाने के लिए आयोजित किया जा रहा था. कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति को निरस्त नहीं किया गया है, बल्कि स्थगित किया गया है. यह कार्यक्रम जल्द ही होगा. ईसाई आदिवासी महासभा के द्वारा नृत्य की प्रेक्टिस की जा रही है.

प्रशासन के अनुसार आठ नवंबर को अंबिकापुर शहर के कई जगहों पर नर्तक दल के प्रतिभागी सेंट जेवियर्स विद्यालय परिसर में नृत्य का प्रेक्टिस करेंगे. आयोजन की मंजूरी पर नृत्य का आयोजन होगा .

आदिवासी समाज ने की थी आपत्ति

ईसाई आदिवासी महासभा द्वारा प्रस्तावित उरांव नृत्य महोत्सव का आदिवासी समाज ने विरोध किया था. और पिछले दिनों विरोध करते हुए शहर में रैली निकाली गई थी. आदिवासी समाज का कहना था कि जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन करके ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है उन्हें अब करमा की याद कैसे आ रही है. ईसाई बनकर उन्होंने अपनी जनजाति परंपरा संस्कृति को अपनी स्वयं की इच्छा से छोड़ा है. उन्हें अपने ईसाई धर्म में मनाए जाने वाले उत्सव को मनाना चाहिए. लेकिन हमारी संस्कृति में अतिक्रमण करने के उद्देश्य से इस प्रकार का आयोजन किया जा रहा है. जिस दिन कोई भी आदिवासी व्यक्ति विधिवत रूप से धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म को स्वीकार करता है. उस दिन से मूल रूढ़ी प्रथा, संस्कृति को त्यागकर ही ईसाई धर्म अपनाते हैं. यह मुद्दा जोर शोर से उठता रहता है कि जो व्यक्ति अपने जातिगत रूढ़ी प्रथा,  रीति-रिवाज, पूजा – पाठ, पर्व त्यौहार,  नेग नियम के अनुसार आचरण नहीं करता हो. उसको अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर किया जाना चाहिए. वर्तमान में उन्हें डिलिस्टिंग करने की मांग उठ रही है इसलिए धर्मांतरित आदिवासी में बने रहने के लिए आडंबरपूर्ण कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं. आदिवासी महासभा की आपत्ति व विरोध को देखते हुए ही प्रशासन ने आयोजन की अनुमति को स्थगित कर दिया है.

HC  में की गई थी याचिका दायर

ईसाई आदिवासी महासभा द्वारा प्रस्तावित उरांव नृत्य महोत्सव के विरोध में जनहित याचिका उच्च न्यायालय में भी दायर की गई थी. इसके पहले ही आयोजन के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने पूर्व में जारी अनुमति को स्थगित कर दिया था. एसडीएम प्रदीप साहू ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पीआइएल को लेकर जो सूचना मिली है. उसके अनुसार प्रशासन द्वारा अनुमति स्थगित कर देने से उच्च न्यायलय ने भी जनहित याचिका को खारिज कर दिया है.

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