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छत्तीसगढ़: हिंदू और ईसाई के घरों में काम करने वाले आदिवासियों पर जुर्माने का फरमान

Posted on March 17, 2023 - 1:41 pm by

छत्तीसगढ़ में बस्तर के रान सरगीपाल गांव में ग्राम सभा में कई निर्णय लिए गए हैं. जो चर्चा का विषय बना हुआ है, इन निर्णयों में कुछ ऐसे हैं जो काफी कठोर है. जिसमें हिंदू-ईसाई के घरों में काम करने वाले आदिवासियों पर जुर्माना, अन्य धर्मों के व्यक्ति को मरने पर गांव में जगह न दिया जाना, बाहरी त्यौहार मनाने व धर्म प्रचार पर मनाही आदि शामिल है.

इन निर्णयों को बताने के लिए गांव के सैंकड़ो आदिवासी गुरूवार को जगदलपुर शहर पहुंचे. दरअसल ग्रामीण इन निर्णयों को कड़ाई से पालन करवाने की जानकारी अफसरों को देने आये थे. लेकिन अफसरों ने गांव के लोगों से मुलाकात नहीं की. एडिसनल एसपी निवेदिता पॉल ने ग्रामीणों से मुलाकात कर स्पष्ट किया कि उन्होंन जो ज्ञापन में लिखा है सहीं नहीं है.

उन्होने बताया कि हमने इलाके के सरपंचों से कहा कि उन्हें पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून में क्या-क्या कानून है इसकी स्पष्ट और विस्तृत जानकारी दी जाएगी. और इसके लिए उन्हें अलग से बुलाया गया है.

छत्तीसगढ़ में धार्मिक ध्रुवीकरण

कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने है, इसको लेकर कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ चुनाव में धर्म चुनाव के केंद्र मे हो सकता है. इसके लिए ध्रुवीकरण का प्रयास शुरू हो चुका है. पिछले साल छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में आदिवासियों के बीच धर्म को लेकर झगड़े देखने को मिले थे. जिसमें बस्तर के कई ईसाई आदिवासी नारायणपुर में शरण लिए थे. इसको लेकर देशभर में निंदा भी गई थी. इसके साथ छत्तीसगढ़ के कई शहरों में चक्काजाम भी देखने को मिले थे.

बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सीट है, जिसमें से 29 विधानसभा सीट आदिवासियों के लिए रिजर्व है.

ग्रामीणों ने पेसा कानून का दिया हवाला

ग्रामीणों की ओर से कलेक्टर के नाम ज्ञापन में बताया गया है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है. पांचवीं अनुसूची भारतीय संविधान भाग – 10 के अनुच्छेद 244, 13(3)(क), 19(5), 19(6) पैरा – 5 25(ट) के तहत संवैधानिक पांचवी अनुसूची क्षेत्र गांव, गणराज्य रानसरगीपाल परगना आगरओरा तहसील तोकापाल, जिला – बस्तर (छग) कोदई माता के गुड़ी में रविवार को एक ग्राम सभा हुई. ग्राम प्रमुक, माटी पुजारी, गायता पेरमा, पटेल, कोटवार, सिरहा, गुनिया की उपस्थिति में प्रस्ताव पास किया गया. इसकी अध्यक्षता सीताराम बाकड़ा कर रहे थे.

ग्रामीणों ने इन प्रस्तावों को किया था पारित

रानसरगीपाल के ग्राम सभा द्वारा पारित निर्णयों में कोदई माता के सीमा में होने वाले धार्मिक कार्य के लिए ग्रामसभा से अनुमति लेना आवश्यक होगा, इसके अलावा सरकारी निर्माण कार्य, भूमि-खरीद बिक्री, सामुदायिक संसाधन वन पट्टा में पारंपरिक सीमांकन किया जाना आदि भी शामिल है.

अन्य धर्म का व्यक्ति गांव में मरता है तो दफनाने के लिए जगह नहीं देने की बात

वहीं कोदई माता के नियमों के विपरित जाने वालों को गांव से बाहर किया जाना. गांव में किए जाने वाले शादी, नामांकरण और महत्वपूर्ण त्योहार माटी पुजारी के अनुमति से किए जाते हैं. नियम विरूद्ध और बिना ग्राम सभा के कार्य करने से कार्यवाही करने की बात कही है.

इसके अलावा किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा गांव में अन्य धर्म का प्रचार किया जाता है, तो दंड दिया जाना, कोई ईसाई धर्म का व्यक्ति गांव में मरता है तो गांव में शव दफनाने नहीं दिया जाना, इसके अलावा बाहरी धार्मिक त्यौहारों को मनाने पर भी प्रतिबंधित की गई है.

गांव के जल स्त्रोतों के उपयोग पर प्रतिबंध

ग्राम सभा द्वारा लिए गए निर्णय में गांव के जल स्त्रोतों के उपयोग पर भी अन्य धर्म के लोगों को प्रतिबंध किया गया है. इसमे सिर्फ उन जल स्त्रोतों से पानी लेने की अनुमति दी गई है जिसे सरकार ने बनवाया है. यानी की हैंडपंप और जल-नल आदि से. आदिवासी अगर अन्य धर्म के लोगों के खेत या घरों में काम करते हैं तो 5 हजार का जुर्माना लेने की बात कही है. व्यापार के लिए परिचय पत्र और ग्राम सभा से अनुमति को अनिवार्य बताया है. धर्मांतरण और छुआछुत से संस्कृति को खतरें में बताया है.

(Photo: DB)

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