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छत्तीसगढ़: मलखंभ में 17 मेडल जीतकर आदिवासी छात्र ने बनाया रिकॉर्ड

Posted on November 18, 2022 - 11:00 am by

छत्तीसगढ़ के मानू ध्रुव ने केवल 14 साल की उम्र में मलखंभ 17 मेडल हासिल करने का रिकॉर्ड बना लिया है. मलखंभ नेशनल चैंपियनशिप में अपनी पहचान बनाने वाला यह आदिवासी छात्र अबूझमाड़ का निवासी है. बता दें कि नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ को राज्य का सबसे पिछड़ा हुआ क्षेत्र और नक्सल प्रभावित इलाका कहा जाता है. लेकिन अब यह मलखंभ खिलाड़ी मानू ध्रुव के नाम से भी पहचाना जा रहा है.

बाल दिवस पर मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित  

ध्रुव के 17 पदकों में 14 गोल्ड मेडल और 3 ब्रांज मेडल शामिल हैं. उसने नेशनल लेवल पर 8 मेडल और स्टेट लेवल पर 9 मेडल अपने नाम किया है. यह उपलब्धि उसने सिर्फ तीन सालों के अंतराल में हासिल किया है. उसकी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सम्मानित की. बघेल ने बाल दिवस के मौके पर मानु ध्रुव को श्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में सम्मानित किया.

खेल के प्रति लगाव को पिता ने समझा

अबूझमाड़ के असनार गांव के मानू ध्रुव अब राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नाम रोशन कर रहा है. एक किसान के घर में जन्मे मानू का लगाव बचपन से ही खेल के प्रति काफी रहा है. खेल के प्रति रुचि को देखते हुए उसके पिता ने उसे नारायणपुर जिले के देवगांव पोटा केबिन में भर्ती करा दी. यहां मानू पढ़ाई के साथ-साथ अपने प्रशिक्षक मनोज प्रसाद के सहयोग से मलखंभ में भी जोर आजमाने लगा.

मलखंभ देख जागी रुचि

मानु ने बताया कि जिला स्तरीय कार्यक्रम में उसने इस मलखंभ खेल को देखा था. छोटे-छोटे बच्चों को मलखंभ करते देख उसके मन में भी इस खेल के प्रति रुचि जागृत हुई. मानू के प्रशिक्षक मनोज ने बताया कि जब वे देवगांव के पोटा केबिन में बंधो का सलेक्शन करने गए, तब मानु में इस खेल के प्रति लगाव को देखा. उसके बाद से मानू को वह प्रशिक्षण दे रहे हैं.

प्रति माह 10 हजार मिलती है छात्रवृत्ति

प्रशिक्षक मनोज ने बताया कि घर में खराब हालात से गुजर रही थी. इसके बावजूद उसने इस खेल में इतने सारे पदक जीतकर सिर्फ नारायणपुर ही नहीं बल्कि अपने राज्य का भी नाम रोशन किया. अब तक 3 सालों में मानू ध्रुव 17 राष्ट्रीय पदक से सम्मानित हो चुका है. वहीं मानु ध्रुव की प्रतिभा और हासिल पदकों के कारण भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) द्वारा उसे 10 हजार रुपये प्रति माह छात्रवृत्ति भी दी जा रही है.

इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी नाम दर्ज

मनोज प्रसाद ने बताया कि 2017 से क्षेत्र के आदिवासी बच्चों को मलखंभ में विशेष अभ्यास कराया जा रहा है, जिससे यहां के बच्चे अन्य राज्यों में जाकर मलखंभ का बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. साथ ही अपने जिले और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं. हाल ही में मानू ध्रुव ने गुजरात में आयोजित 36वीं नेशनल गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक पर अपनी दावेदारी कायम की. साथ ही इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में पोल मलखंब पर 1 मिनट 6 सेकंड तक हैंडस्टैंड होल्ड कर एक नया रिकॉर्ड दर्ज किया.

लोगों के लिए बना प्रेरणा का विषय

दरअसल नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ भारत का एक अनछुआ हिस्सा है. यह जंगल, पहाड़ और दुर्गम इलाकों से घिरा हुआ है. यहां का जनजीवन नक्सलवाद की वजह से संघर्ष भरा है. वहीं इस क्षेत्र के असनार गांव से निकला राष्ट्रीय मलखंब खिलाड़ी मानु ध्रुव अपने संघर्ष से नई इबादत लिख रहा है. इस आदिवासी छात्र की सोशल मीडिया पर भी जमकर तारीफ की जा रही है. मानु ध्रुव बस्तर के साथ अपने क्षेत्र के खिलाड़ियों का भी रोल मॉडल बन रहा है उसे देखकर सभी खिलाड़ी प्रेरित हो रहे हैं.

कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में जुटा

मानु ध्रुव ने 11 साल के उम्र में मलखंभ नेशनल चैंपियनशिप में पहला गोल्ड मेडल जीता था, जिसके बाद 3 सालों में 17 राष्ट्रीय पदकों को जीतकर अपने क्षेत्र के साथ-साथ छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया. मानु ध्रुव का कहना है कि वह आगे अब कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल होने के लिए तैयारी कर रहा है. उसे पूरा विश्वास है कि 1 दिन छत्तीसगढ़ का पिछड़ा हुआ क्षेत्र अबूझमाड़ पिछड़ा हुआ क्षेत्र नहीं बल्कि यहां के खिलाड़ियों के नाम से जाना जाएगा.

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