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छत्तीसगढ़: आदिवासियों ने क्यों कहा NMDC ने जल-जंगल बर्बाद कर दिया

Posted on November 7, 2022 - 4:41 pm by

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में NMDC  (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) की जनसुनवाई का ग्रामीणों ने 7 नवंबर को विरोध किया. विद्यानगर चौक पर पारंपरिक हथियार लेकर पहुंचे आदिवासी और सड़क जाम कर दी. चौक पर राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

आदिवासियों का कहना था कि जल और जंगल को बर्बाद कर दिया है. नदियां प्रदूषित हो गई हैं, जिसका पानी पीकर मवेशी मर रहे हैं और ग्रामीण बीमार हो रहे हैं. इसके बाद प्रशासन और प्रबंधन की टीम बैरंग लौट गई.

बैलाडीला के डिपॉजिट 14 की क्षमता का करना है विस्तारीकरण

बैलाडीला के डिपॉजिट 14 की क्षमता के विस्तारीकरण के लिए 7 नवंबर को प्रशासन और NMDC  ने जनसुनवाई का आयोजन किया था. इस जनसुनवाई का सयुंक्त पंचायत जनसंघर्ष समिति ने विरोध कर दिया. सैकड़ों की संख्या में आदिवासी किरंदुल के विद्यानगर चौक पर एकत्र हुए. आदिवासियों के विरोध प्रदर्शन के चलते एक भी ग्रामीण नहीं पहुंच सका.

आदिवासियों का आरोप पर्यावरण की शर्तों का पालन नहीं

विरोध प्रदर्शन में 28 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण शामिल हुए थे. आदिवासियों ने आरोप लगाया है कि NMDC  जो कि पिछले 60 सालों से बैलाडीला में लौह उत्खनन का कार्य कर रही है.  उस कंपनी ने कभी भी पर्यावरण स्वीकृति में निहित शर्तो का पालन नही किया है.

आदिवासियों के अनुसार लौह उत्खनन से निकलने वाले लाल पानी से जिले के कई नदियां प्रदूषित हो चुकी है.  दर्जनों प्राकृतिक जल स्रोत विलुप्त हो चुके हैं. हजारों एकड़ जमीन बंजर हो गई और लाखों पेड़ नष्ट हो चुके हैं.

NMDC  की वजह से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है

आदिवासी नेता सोनी सोरी ने बताया कि NMDC 60 सालों से लौह अयस्क का दोहन कर पेड़-पौधों को काट कर रही है. इसके एवज में NMDC  से प्रभावित गांवों को कुछ नहीं दिया जा रहा है. प्रभावित गांवों की संख्या 50 से ज्यादा है,  लेकिन जनसुनवाई में सात गांव के लोगों को ही क्यों बुलाया गया ? आरोप लगाया कि NMDC  की वजह से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है. नदी-नालों का पानी दूषित हो रहा है और पेड़ों को काटकर प्लांटेशन नहीं किया जा रहा है.

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