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छत्तीसगढ़:  क्यों नाचते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा ईसाई आदिवासी समाज?

Posted on November 8, 2022 - 5:11 pm by

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में ईसाई आदिवासी समाज की तरफ से नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाना था. लेकिन दूसरे आदिवासी पक्ष के विरोध के बाद प्रशासन ने आयोजन की अनुमति को आगे बढ़ा दिया. इसके विरोध में ईसाई आदिवासी समाज नाचते हुए सरगुजा कलेक्ट्रेट पहुंचा. विरोध के बाद प्रशासन ने नृत्य की प्रैक्टिस करने की अनुमति दे दी है.

गिनीज बुक के लिए होना था आयोजन

अंबिकापुर के पीजी कॉलेज में 8 नवंबर को ईसाई आदिवासी समाज की तरफ से बड़े स्तर पर नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाना था. यह नृत्य महोत्सव गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के लिए आयोजित किया जा रहा था. आयोजकों ने आयोजन के लिये प्रशासन से अनुमति भी ले ली थी. लेकिन उरांव समाज के लोगों ने आयोजन पर रोक लगाने की मांग कर दी.

पारंपरिक नृत्य करते कलेक्ट्रेट पहुंचे इसाई आदिवासी

प्रशासन ने आयोजन पर रोक तो नहीं लगाई लेकिन आगामी आदेश तक के लिये आयोजन की अनुमति रोक दी. प्रशासन की तरफ से अनुमति बहाल करने की मांग को लेकर आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक नृत्य करते हुये सरगुजा कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपना विरोध जताया. विरोध के बाद प्रशासन की ओर से एसडीएम प्रदीप साहू ने आदिवासी समाज के लोगों से मुलाकात की और आयोजन होने से पहले तक नृत्य के अभ्यास करने की अनुमति दे दी है. अब समाज के लोग शनिवार रविवार और शासकीय अवकाश के दिन नृत्य का अभ्यास कर सकेंगे.

धर्म ईसाई पर हैं तो आदिवासी

आदिवासियों के ही दूसरे पक्ष ने धर्मांतरित ईसाईयों को उरांव समाज का पारंपरिक नृत्य करने पर आपत्ती जताई है. वहीं ईसाई समाज के आदिवासियों का कहना है कि भले ही वे ईसाई धर्म को मानते हैं लेकिन वे भी आदिवासी ही है.

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