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राजस्थान: आदिवासी महिला के अस्पताल की गैलरी में प्रसव से बच्चे की मौत

Posted on November 1, 2022 - 3:07 pm by

राजस्थान में चितौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में बोराव अस्पताल संवेदनहीनता का मामला सामने आया था. जिसमें प्रेग्नेंसी के दर्द से तड़पती एक आदिवासी महिला को समय रहते ईलाज नहीं मिल सका. अस्पताल की गैलरी में प्रसव हो जाने नवजात की मौत हो गई. इसके बाद आदिवासी महिला की डिलीवरी के मामले में अस्पताल प्रशासन पीड़िता पर अपना बचाव करने का दबाव बना रहा है.

क्या है पूरा मामला

महिला के पति नारायण भील के अनुसार बोराव अस्पताल पहुंचने पर नर्सिंग स्टॉफ ने उसकी पत्नी की तरफ ढंग से देखा तक नहीं. इसके बाद रैफर कार्ड बनाकर भज दिया. परिजनों ने एम्बूलेंस दिलवाने की मांग की तो वो भी उपलब्ध नहीं करवायी. ऐसे में भील परिवार किराए की गाड़ी लेकर रावतभाटा उपजिला अस्पताल पहुंचे. यहां वार्ड में ही महिला का प्रसव हुआ.

महिला के पति नारायण ने बताया कि घटना के वक्त उसकी मां,  सास,  ड्राइवर और खुद मौके पर मौजूद थे. प्रसव कक्ष में जाने से पहले आधा नवजात बाहर आ चुका था. उनके अनुसार वह कितना भी दबाव बना लें, पीछे नहीं हटेंगे. उसने अपना बच्चा खोया है.  किसी और के साथ न हो,  इसलिए वह अब पीछे नहीं हटेगा.

अस्पताल का कहना है कि महिला या उसके परिवार के सदस्यों पर बयान बदलने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया गया है. हमारे पास सीसीटीवी फुटेज हैं. महिला की डिलीवरी डिलीवरी रूम में ही हो गई. बच्चा पहले ही मर चुका था.

इसके अलावा मामले में बोराव प्राथमिक स्वास्थ केंद्र की एएनएम एम्मारम्मा का का कहना है कि अस्पताल के डॉक्टर जयप्रकाश छुट्टी पर थे. गर्भवती महिला की प्री मेच्योर डिलीवरी के कारण समय बचाने के लिए उसे जल्द से जल्द बेगू अस्पताल भेजना जरूरी था. परिजन निजी वाहन लाए थे. बेगूं में गायनोलॉजिस्ट डॉक्टर अवेलेबल है. महिला को जल्द से जल्द अच्छा ईलाज मिल सके, इस वजह से एम्बुलेंस बुलाने में समय गवाना उचित नहीं समझा.

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