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आदिम जनजातियों के विकास पर 10 अरब से अधिक खर्च का दावा

Posted on April 7, 2023 - 11:14 am by

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

कमजोर जनजाति (PVTGs) सहित अनुसूचित जनजाति के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए केंद्र सरकार विभिन्न योजनाएं बनाती है. इसके अलावा सरकार ने पीवीटीजी के लिए “पीवीटीजी का विकास” नाम से विशेष योजना लागू की है. सरकार ने साल 2017-22 तक पीवीटीजी के लिए विशेष रूप से योजना में 10 अरब 39 करोड़ 48 लाख रूपये जारी किए हैं.

यह जानकारी जनजाति मामलों में केंद्रीय राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडु ने राज्यसभा में 5 अप्रैल को दिए एक सवाल के जवाब में बताया.

केंद्र सरकार विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समुदाय के छात्रों के लिए एकलव्य स्कूलों में 5 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था करती है. बता दें पीवीटीजी वर्ग जनजातियों में सबसे कमजोर वर्ग है. इनकी जनसंख्या या तो स्थिर अवस्था में है या घट रही है. साक्षरता भी कम देखी गई है, इसके अलावा जीवन स्तर महज जीवित रहने तक सीमित है.

भारत सरकार ने ऐसे 75 कमजोर आदिवासी समूहों को पीवीटीजी में शामिल किया है, जो कि 18 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों अंडमान निकोबार में फैले हुए हैं.

इससे संबंधित सवाल पश्चिम बंगाल से त्रृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद दोला सेन ने जनजातीय कार्य मंत्रालय से सवाल किए थे. जिसमें उन्होंने पूछा था कि पांच सालों में सरकार ने पीवीटीजी के विकास में कितना खर्च किया है. उनके मानव विकास सूचकांक कम होने के कारण क्या हैं.

इसके अलावा वो यह भी जानना चाह रही थी कि FRA, 2006 के माध्यम से पीवीटीजी को कितना लाभ मिला है और क्या ग्राम सभा के अधिकार को कम किया गया है.

राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पीवीटीजी के लिए विशेष रूप से योजना में केंद्र सरकार ने साल 2017-18 में 239 करोड़ 39 लाख रूपये, साल 2018-19 में 250 करोड़ रूपये, साल 2019-20 में 249.99 करोड़ रूपये, साल 2020-21 में 140 करोड़ रूपये और साल 2021-22 में 160 करोड़ रूपये जारी किए थे.

वहीं FRA, 2006 के पर सरकार ने कहा कि एफआए के नियम 5(ग) एवं 7(ग) की व्यवस्था की गई है, जिसमें वन अधिकारों की मान्यता की प्रक्रिया में उप-मंडलीय समिति एवं जिला स्तरीय समिति में आदिम जनजाति के सदस्यों को रखा गया है. नियम 8(ख) के अनुसार आदिम जनजाति के सदस्य दावों की जांच करती है. नियम 12(घ) में वन अधिकार के दावों को सत्यापित करती है.

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राज्य सरकार का हवाला देते हुए बताया कि कुल 44,66,617 दावे किए गए हैं, जिसमें 42,97,245 व्यक्तिगत और 1,69,372 सामुदायिक दावे हैं.

वन भूमि के लिए 1,68,29,864 एकड़ दावें हैं, जिसमें 45,68,053 एकड़ व्यक्तिगत और 1,22,61,811 एकड़ सामुदायिक है. इसमें से 22,49,671 अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं. जिसमें से 21,46,782 व्यक्तिगत और 1,02,889 सामुदायिक शामिल है.

वहीं ग्राम सभा के अधिकारों को कम करने के सवाल पर सरकार ने कहा कि एफआरए के तहत ग्राम सभा का कोई अधिकार कम नहीं किया गया है.

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