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दिल्ली: सरना धर्म कोड की मांग को लेकर दिल्ली में सभा का आयोजन

Posted on November 12, 2022 - 2:02 pm by

दिल्ली में 11 नवंबर को आदिवासियों के लिए अलग सरना धर्म कोड की मांग के समर्थन में सामूहिक चर्चा की गई. राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान एवं दिल्ली सरना समाज के नेतृत्व में सम्मेलन हुआ. कॉंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित इस सम्मेलन में आदिवासी सेंगेल अभियान और कई अन्य प्रमुख सामाजिक संगठनों की उपस्थिति देखने को मिली.

कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए, कार्यक्रम की शुरूआत तीन आदिवासी भाषा से हुई

सम्मेलन की शुरुआत दोपहर में की गई. जिसमें भाग लेने वाले मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से प्रतिनिधि शामिल हुए. इन सब की राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा की अध्यक्षता धर्मगुरु बंधन तिग्गा एवं दिल्ली सरना समाज के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार भगत ने की. कार्यक्रम की शुरुआत सरना प्रार्थना मुंडारी, कुरुख एवं संथाली भाषा में बारी बारी से संपन्न हुई. मंच का संचालन रवि तिग्गा, संजय पाहन एवं सुशांत तिर्की ने संयुक्त रूप से किया.

इस सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया कि सरना धर्म कोड के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में जोरदार आंदोलन चलाया जाएगा. यह भी तय किया गया है कि हर हालत में सरना धर्म कोड जनगणना फ़ॉर्म में शामिल किया जाए. इस माँग के समर्थन में देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा. प्रतिनिधि सभा में कहा गया कि आजाद भारत में भारत के जनजाति समाज के धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मसले को गंभीरता से नहीं लिया गया है.

धर्म कोड न मिलने पर धार्मिक गुलामी और धार्मांतरण के लिए बाध्य होना पड़ा

इस दौरान केंद्र सरकार के साथ-साथ उन राज्यों के सरकार की जवाबदेही की बात उठाई गई. जहां आदिवासी बाहूल्य हैं. इसके तहत उन्हें जवाब देना होगा कि आजाद भारत में क्यों आदिवासियों को धार्मिक गुलामी और धर्मांतरण के लिए बाध्य किया गया है. चूंकि ये भारतवर्ष के मूल निवासी और दावेदार हैं, तो इसमें सबसे पहले धर्मकोड को आवंटित किया जाना था. सम्मेलन में आदिवासी नेताओं ने कहा कि उनके धर्म को पृथक पहचान नहीं देना एक गहरी साजिश का आभास देता है.

प्रतिनिधि सभा में उपस्थित लोगों का स्वागत और परिचय नारायण उरांव ने किया. साथ ही शिक्षाविद डॉ करमा उरांव ने विषय वस्तु को विस्तार से रखी. इनके बाद विषय वस्तु पर सालखन मुर्मू, डॉ हीरालाल अलावा, प्रदीप भगत, भगवान दास मुंडा, बिरसा उरांव, डॉ गोमती बोदरा, डॉ आयशा उरांव, राजेश भगत, शिवा कच्छप, झरियो केरकेट्टा, दुर्गावती ओड़ेया, मंथुरा कंडीर, संगम उरांव, रामदेव भगत, निर्मला भगत, बलकू भगत, अमर उरांव, रंथू उरांव, धाना उरांव ने अपने अपने विचार रखें.

फरवरी व मार्च 2023 में बड़ा आयोजन

दिल्ली स्थित जंतर-मंतर में 12 नवम्बर को हजारों की संख्या में सरना धर्मावलंबी महाधरना में शामिल होंगे. धरने के बाद भारत की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री एवं रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को धरना के माध्यम से ज्ञापन सौंपा जाएगा. कार्यक्रम में निर्णय लिया गया कि झारखंड में 26 फरवरी को सरना धर्म कोड के लिए झारखंड के रांची में महारैली का आयोजन होगा . इसके बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में अगले वर्ष के मार्च अप्रैल में महाजुटान होगा.

सम्मेलन के बाद आदिवासी नेताओं ने जनजातीय कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा को पृथक सरना धर्म कोड के लिए स्मार पत्र सौंपा. इन नेताओं ने अर्जुन मुंडा से आग्रह किया कि धर्मकोड के मसले को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने पेश करें.

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