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निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन को बोडो नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन (बोनसू) ने आदिवासी विरोधी कदम बताया

Posted on January 3, 2023 - 1:10 pm by

बोडो नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष बोनजीत मोनजिल बासुमतारी ने असम के कोकराझार में 2 जनवरी को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और एसटी निर्वाचन क्षेत्रों को छठी अनुसूची में शामिल करना एकजनजातीय विरोधी कदम है. इसके साथ ही उन्होने कहा कि भारत सरकार को जनजातीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.

बोडो और असम के अन्य आदिवासी समुदायों के लिए और उनकी ओर से BONSU  ने परिसीमन की सरकारी अधिसूचना की कड़ी निंदा और विरोध किया. इसके साथ ही उन्होने इसे दुर्भाग्यपूर्ण, आदिवासी विरोधी और असंवैधानिक बताया.

विदेशों से आने वाले लोग है हावी

बोन्सू के अध्यक्ष बोनजीत मोनजिल बासुमतारी ने आगे कहा कि अनुच्छेद 330 के उप-खंड के अनुसार, भारतीय संविधान की धारा 1 (सी) में अनुसूचित जनजाति के लिए सामान्य सदन में आरक्षण का गठन किया गया है, जो स्पष्ट रूप से समान प्रतिनिधित्व की बात करता है. असम के स्वायत्त जिलों में कमजोर, हाशिए पर, कम प्रतिनिधित्व और विशेष सुरक्षा का अधिकार देता है. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक और संवैधानिक रूप से असम के बोडो आदिवासी और अन्य आदिवासी लोगों को भारत और विदेशों के विभिन्न हिस्सों से आने वाले गैर-आदिवासी लोगों द्वारा उत्पीड़ित व  दबाया जा रहा है, वे हावी हो चुके हैं.

असम का मुख्यमंत्री आदिवासी हो

उन्होंने कहा, “हम असम संविधान सभा में सीटों के 75% आरक्षण की मांग करते हैं, अगर इसे 126 से अधिक संविधान सभा सीटों तक बढ़ाया जाए, या भले ही यह भारत के संवैधानिक प्रावधान के अनुसार एक ही संविधान सभा की सीटें बनी रहे.” इस परिसीमन के माध्यम से बोन्सू मूल आदिवासी समुदाय से असम के मुख्यमंत्री का आरक्षण चाहता था क्योंकि हमारे पास हर संवैधानिक अधिकार और प्रावधान हैं. स्वतंत्रता और उनके वैध अधिकारों और दायित्वों पर हावी होना.

बासुमतारी ने कहा कि किसी भी गैर-आदिवासी को आदिवासी लोगों की जायज मांग का विरोध करने का अधिकार नहीं है. क्योंकि उनका कोई ऐतिहासिक और संवैधानिक अधिकार और नैतिक दायित्व नहीं है कि वे असम के बोडो आदिवासी और आदिवासी जनजाति लोगों के राजनीतिक आत्मनिर्णय और आत्म-स्वायत्तता को छीन लें.

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