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गुजरात: आप विधायक ने की आदिवासियों के लिए अलग राज्य ‘भील प्रदेश’ की मांग

Posted on April 5, 2023 - 11:19 am by

आदिवासियों के लिए अलग राज्य “भील प्रदेश” की मांग फिर से जोर पकड़ रही है. आम आदमी पार्टी(आप) के विधायक और आदिवासी नेता चैत्र वसावा ने गुजरात और तीन पड़ोसी राज्यों को मिलाकर आदिवासियों के लिए अलग राज्य “भील प्रदेश” की मांग उठायी. वहीं इस मांग पर भाजपा सांसद मनसुख वसावा कहना है कि इससे “अराजकता” फैलेगी और आदिवासी समुदायों और अन्य लोगों के बीच संघर्ष पैदा होगा.

आप विधायक ने मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि “इतिहास हमें बताता है कि भील प्रदेश नामक एक अलग राज्य था. लेकिन स्वतंत्रता के बाद उस राज्य को विभाजित किया गया और इसके हिस्सों को गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे विभिन्न राज्यों में मिला दिया गया.”

बता दें कि चैत्र वसावा गुजरात के नर्मदा जिले की देदियापाड़ा सीट से पहली बार विधायक बने है. यह सीट अनुसूचित जानजाति के लिए आरक्षित है.

पिछले दिनों भारतीय ट्राइबल पार्टी के संस्थापक व पूर्व विधायक छोटूभाई वसावा ने भील प्रदेश की मांग उठाई थी. छोटूभाई वसावा के दावों के अनुसार चार राज्यों में 39 आदिवासी बहुल जिले हैं. ये सभी भील प्रदेश के हिस्से हैं.

चैत्र वसावा ने कहा कि संविधान की पांचवीं अनुसूची (जिसमें अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण के संबंध में प्रावधान हैं) अभी भी इन जिलों पर लागू है.

उन्होंने कहा कि छोटूभाई वसावा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कई साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को इस मांग से जुड़ा एक ज्ञापन सौंपा था. यदि आदिवासियों के साथ अन्याय करना जारी रखा जाता है, तो हम निश्चित रूप से एक अलग भील प्रदेश की मांग उठाएंगे.”

उन्होंने कहा कि केवड़िया में आदिवासी समुदायों की हजारों हेक्टेयर जमीन विभिन्न परियोजनाओं के लिए बाहरी लोगों को दे दी गई. इसी स्थान पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी स्थित है. इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र के आदिवासी जो जमीन के असली मालिक थे, अब 280 रुपये प्रति दिन पर मजदूरों के रूप में काम करने के लिए मजबूर हो गए हैं.”

उन्होंने कहा, “चूंकि हमारे जल, जंगल और जमीन पर हमारा अधिकार छीना जा रहा है, हम फिर से अलग भील प्रदेश की मांग उठा रहे हैं.”

उन्होंने दावा किया कि आदिवासी क्षेत्र पानी, लकड़ी और कोयले के भंडार के साथ-साथ अन्य खनिजों से समृद्ध हैं, लेकिन वे अविकसित हैं और गुजरात में भाजपा सरकार ने आदिवासी समुदायों के लिए बजट को डायवर्ट कर दिया.

भाजपा नेता ने किया भील प्रदेश का विरोध

भरूच से बीजेपी सांसद मनसुख वसावा ने मांग का विरोध करते हुए कहा, “इस मांग से कई क्षेत्रों में अराजकता फैलेगी. इससे आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच संघर्ष भी पैदा होगी, जो अंततः आदिवासी क्षेत्रों में विकासात्मक परियोजनाओं के कार्यान्वयन को प्रभावित करेगी.”

उन्होंने कहा कि दाहोद के पूर्व सांसद सोमजीभाई डामोर ने मूल रूप से आदिवासियों के लिए एक अलग राज्य के लिए एक आंदोलन शुरू किया था. इसके बाद अन्य आदिवासी नेताओं ने भी बाद में इस आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी ठंडी प्रतिक्रिया मिली क्योंकि अधिकांश आबादी इसका समर्थन नहीं करती है.”

उन्होंने कहा कि एक अलग राज्य की मांग करने के बजाय, क्या कमी है और कैसे आदिवासियों के लिए बनाई गई योजनाओं को ठीक से लागू किया जा सकता है. इस पर विचार करना चाहिए.

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