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धुनि सोरेन ने दुमका सांसद से मुलाकात की

Posted on October 12, 2022 - 6:53 am by

दुमका। दुमका परिसदन में दुमका के सांसद सुनील सोरेन से डॉ धुनि सोरेन ने औपचारिक मुलाकात कर उन्होंने अपनी दो लिखित पुस्तक हिस्ट्री ऑफ संथाल एवं ऑटोबायोग्राफी ( आत्मकथा) भेंट की. डॉ धुनि सोरेन ने बताया कि अमेरिका में जो संतालवासी बसे हैं. उसका एक संघ बनाया गया है इस संघ का नाम संताल इंटरनेशनल एसोसिएशन है. इस एसोसिएशन में करीब 50 लोग शामिल है. डॉ धुनि सोरेन ने बताया कि इस एसोसिएशन में हम मुख्य सलाहकार है। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन का काम बच्चों को संताली भाषा को सिखाना, संताली भाषा पड़ना, बोलना आदि सिखाया जाता है. इसके अलावा मुलाकात के दौरान डॉ धुनि सोरेन ने बताया कि उन्होंने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए तीन बार पत्र लिखा, मेल भी किया पर अभी तक ना पत्र का और ना ही कोई मेल का जवाब नहीं आया. उन्होंने दुमका के सांसद सुनील सोरेन का आग्रह किया है कि इन सब सारी बातों को महामहिम के समक्ष रखें ताकि मुलाकात हो सके. सांसद सुनील सोरेन ने आश्वासन दिया है कि बहुत जल्द आपकी मुलाकात भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से होंगी.

लंदन में बसकर भी अपनी धरती से नहीं कटे हैं 

संताल परगना के गोड्डा जिला के बोआरीजोर गांव में डॉ धुनि सोरेन का जन्म हुआ था, वर्तमान में लंदन में डॉक्टर के रुप में स्थापित हैं. डॉ. सोरेन की सबसे बड़ी खासियत है कि 55 साल से लीवरपुल लंदन में बस जाने के बाद भी वे अपनी धरती से नहीं कटे हैं। 85 वर्ष की अवस्था में भी समाजिक जीवन में वे काफी सक्रिय हैं और जब भी अवसर मिलता है,संताल परगना आते हैं और आदिवासियों के सामाजिक आर्थिक बदलाव के लिए चिंतित रहते हैं। यहां डंगालपाड़ा में उनका अपना एक घर है. जब भी भारत आते हैं तो यहां कुछ दिन बिताते हैं. सिदो कान्हु मुर्मू विश्विवद्यालय में संताल अकादमी सहित कई संस्था और सामाजिक संगठनों से वे जुड़े हुए हैं. डॉ. धुनी सोरेन का कहना है कि आदिवासी समाज को अवसर का लाभ उठाने की जरुरत है. केवल डिग्री ले कर नौकरी करना ही अवसर नहीं है। झारखंड में भी अलग-अलग क्षेत्र में आगे बढ़ने का पर्याप्त अवसर है. आदिवासी युवाओं को अपनी सोच विकसित करने की जरूरत है। केवल अपने आप में सीमित रहने के बजाए मुख्य धारा से घुलने-मिलने की जरूरत है। डॉ. सोरेन ने कहा कि आदिवासी युवा आंख और दिमाग खुला रखें। वैसे आदिवासी जो खुद पढ़े-लिखे हैं वे अपने नीचे की पीढ़ी को सलाह दें. आगे बढ़ने की नई राह दिखाएं.

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