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सरकार के साथ मेटा दे रही है आदिवासियों को डिजिटल शिक्षा

Posted on October 17, 2022 - 5:12 am by

विजय उरांव

कोल्हापुर से शिवसेना के सांसद संजय सदाशिवराव मांडलिक और गोरखपुर से भाजपा के सांसद ने जनजातीय कार्य मंत्रालय से पुछा था कि क्या सरकार देश में 10 लाख जनजातीय युवाओं और महिलाओं को डीजिटल कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु मेटा(पुर्व में फेसबूक) के साथ कोई सहयोग किया है. जीओएएल (गोइंग ऑनलाइन एज लीडर्स) कार्यक्रम में कुल कितने जनजातीय लीडर्स लाभांवित हुए है. जनजातीय युवाओं और महिलाओं के लिए डिजीटल कौशल प्रशिक्षण/जीओएएल 2.0 का दूसरा चरण शुरू करने का लक्ष्य क्या है. सरकार द्वारा देशभर में जनजातीय युवाओं और महिलाओं को डीजिटल कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु कितनी धनराशि की खर्च की गई. सरकार द्वारा देश के जनजातीय समुदाय के जीवन में डिजीटल तौर पर बदलाव लाने हेतु उठाये गए है.

18 जुलाई को जीओएएल पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि गोल (गोइंग ऑनलाइन एज लीडर्स) जनजातीय मंत्रालय और मेटा (पुर्व में फेसबूक) की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य मेंटर और मेंटी की अवधारणा के माध्यम से जनजातीय युवाओं और महिलाओं का डिजीटल सशक्तिकरण करना है. गोल कार्यक्रम का पहला चरण मई 2020 में एक प्रमुख परियोजना के रूप में शुरू किया गया था और इसे दिसंबर 2021 तक पूरा किया गया था. पहले चरण में मेंटियों को तीन पाठ्यक्रम स्तंभों में 40+ घंटों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। जिसमें 1) संचार और जीवन कौसल 2) डीजिटल उपस्थिति को सक्षम बनाना 3) नेतृत्व और उद्यमिता शामिल है.

कार्यक्रम पुरी तरह से मेटा(फेसबूक इंडिया) द्वारा वित्त पोषित है। पहले चरण के हिस्से में भारत के 23 राज्यों के 176 जनजातीय युवाओ को ऑनलाइन प्रक्रिया आवेदन के माध्यम से चुना गया था. फेसबूक द्वारा मेंटियों को एक स्मार्ट फोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी भी दिया गया था.

गोल प्रोग्राम (गोल 2.0) का दूसरा चरण 28 जून 2022 से शुरू किया गया था. जिसका उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देकर और डिजीटल तकनीक का उपयोग करके जनजातीय युवाओं के कौशल को डिजीटल रूप से उन्नत बनाना था. पहले चरण में 1 मेंटर से 2 मेंटर्स से जोड़कर ऑनलाइन डिजीटल मेंटर्शिप प्रदान की गई थी. गोल 2 के कार्यक्रम में जनजातीय समुदाय के सभी लोगों के लिए खुला होगा। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय युवाओं को फेसबूक जीवंत(लाइव) सत्र और मेटा बिजनेश कोच, एक डिजीटल लर्निंग टूल के माध्यम से अपस्किल और डिजीटल रूप से सक्षम बनाना है. 50000 वन धन स्वयं सहायता समूहों के 10 लाख से अधिक सदस्यों पर विशेष फोकस रहेगा। वे अपने उत्पादो की बाजार मांग, पैकैजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के संबंध में डिजीटल रूप से प्रशिक्षित होंगे. गोल 2 विभिन्न क्षेत्रों में उद्योग विशेषज्ञों से लाइन सत्रों के आधार पर मेंटियों की आवश्यकता के अनुसार चैटबाट के प्रावधान के साथ जनजातीय युवाओं के भीतर प्रशिक्षण के लाभों की अधिकतम भागीदारी और लाभ को सक्षम बनाएगा.

जनजातीय कार्य मंत्रालय, आईटी और इलेक्ट्रानिक्स मंत्रालय के समन्वय से, कार्यक्रम के तहत चुने गए 175 इएमआरएस स्कूलों में से प्रत्येक में 6 डिजीटल कक्षाएं प्रदान करेगा. यह परियोजना इआरनेट द्वारा कार्यान्वित की जा रही है. जो एमईआईटीवाई(मेटी) के तहत एक स्वायत संगठन है. जिसका वित्तपोषण मेटी के पास उपलब्ध एसटीसी निधि के माध्यम से और 10 फीसदी निधियन एनईएसटी द्वारा किया जा रहा है.

कौशल भारत मिशन के तहत, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय अपनी फ्लैगशिप योजना प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को लागु कर रहा है. पीएमकेवीवाई 3.0 के तहत डिजीटल टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री 4.0 में कौशल विकास पर भी फोकस किया गया है. सेक्टर स्किल कॉउंसिल ने नई और उभरती डिजीटल तकनीकों और उद्योग 4.0 कौशल जैसे आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स में भी रोजगार का सृजन किया है. पीएमकेवीवाई 2.0 तथा 3.0 के तहत सभी राज्यों को 2656 करोड़ आवंटित राशि में से 1244 करोड़ रूपये निधि जारी की गई। पीएमकेवीवाई 3.0 योजना के तहत देशभर के 32521 महिलाओं, 23170 पुरूषों तथा 2 ट्रांजेंडर (कुल – 55693) अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण पाया है.

एमएसडीईके पास वर्ष 2022-23 के दौरान जनजातियों के कौशल विकास से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों के लिए अनुसूचित जनजाति घटक (एटीसी) के 203 करोड़ रूपये का बजट है. एमएसडीई के तत्वाधान में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ने स्किल इंडिया पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन कौसल की शुरूआत की है। यह प्लेटफार्म डिजाईन थिंकिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और डिजीटल मार्केटिंग जैसे पेशेवर कौशल के साथ-साथ उभरती प्रौद्योगिकी जैसे साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन, आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, प्रेडिक्टिव मॉडलिंग, स्टैस्टिकल बिजनेस एनालिटिकल, क्लाउड और इंटरनेट ऑफ थिंग्स सिखने का अवसर प्रदान करता है. इसके अलावा स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय केन्द्र प्रायोजित योजना “समग्र शिक्षा” के अंब्रेला के तहत स्कूली शिक्षा के व्यवसायोन्मुख करने की पहल को कार्यान्वित कर रहा है.