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दिलीप तिर्कीः भारत के लिए 400 से अधिक इंटरनेशनल मैच खेलनेवाले एकमात्र आदिवासी हॉकी खिलाड़ी

Posted on November 25, 2022 - 2:48 pm by

विजय उरांव

साल 1977 का 25 नवंबर ओडिशा और भारतीय हॉकी के लिए एक खास दिन लेकर आया था. भारतीय हॉकी को लंबे समय बाद एक दिवाल मिलने जा रहा था. जिसके रहते ये तय था कि चाहे कितनी भी बड़ी टीम हो, भारत गोल नहीं खा सकता. इस दिवाल का नाम है दिलीप तिर्की.

कुल 412 इंटरनेशनल मैच. भारतीय हॉकी के इतिहास में ऐसा करनेवाला एकमात्र खिलाड़ी. अटलांटा ओलिंपिक 1996, सिडनी ओलंपिक 2000 और एथेंस ओलंपिक 2004 इनके खाते में है. उपलब्धि ऐसी कि साल 2004 में पद्मश्री, साल 2002 में अर्जुन अवार्ड, साल 1996 में एकलव्य अवार्ड इस खिलाड़ी के घर की शोभा बढ़ा रहे हैं.

वर्तमान में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप का जन्म ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के गांव में हुआ था. पिता विंसेंट तिर्की भी हॉकी के खिलाड़ी रह चुके थे. मां रोजिना तिर्की हाउसवाइफ लेकिन खेल प्रेमी थी. शायद यही वजह था कि रोजिना के तीनों बेटे हॉकी खिलाड़ी बने.

कैसे बने हॉकी इंडिया के दीवार

साल 1995 से अपना अंतरराष्ट्रीय कैरियर शुरू करनेवाले दिलीप के बारे में वरिष्ठ खेल पत्रकार शैलेष चतुर्वेदी बताते हैं कि, ‘’जब वो अपने खेल के सबसे बेहतरीन दौर यानी 2000 से 2008 तक, से गुजर रहे थे, उस वक्त शायद ही ऐसा कोई मैच रहा हो जिसमें दिलीप बेंच पर बैठा हो और भारत ने गोल न खाया हो. दिलीप जब तक मैदान में रहे, बहुत कम ऐसे मौके आए जब भारत ने गोल खाया हो.’’

एक प्रशिक्षण शिविर को याद करते हुए शैलेष बताते हैं, ‘’साल 2002-03 के आसपास एक ट्रेनिंग कैंप लगा हुआ था. देशभर के खिलाड़ी जमा थे. पंजाब के खिलाड़ियों को बोलबाला था. उस कैंप को फिटनेस कोच संपत कुमार लीड कर रहे थे. फिटनेस टेस्ट के बाद जब मैंने उनसे बात की तो संपत का कहना था कि सभी खिलाड़ियों में सबसे अधिक फिट दिलीप ही है.’’

वो कहते हैं, शायद यही वजह रहा कि वो 412 मैच खेल गया. एक और खास बात उनमें ये था कि उनसे ज्यादा पावरफुल शॉट्स कोई नहीं मार पाता था. अगर उनके टखने में चोट नहीं लगता रहता तो वो भारत के लिए चौथा ओलंपिक भी खेल सकते थे.

इस खेल की बदौलत ही दिलीप भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे. विनम्र और मृदुभाषी होने के बावजूद दिलीप मैदान पर बहादुर थे. साल 2004 में दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में एक अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान महान पाकिस्तानी ड्रैग-फ्लिकर सोहेल अब्बास का एक धमाकेदार शॉट पेनल्टी कार्नर का बचाव करते हुए दिलीप की दाहिनी आंख पर लगा. इस चोट ने दिलीप को अंदर तक झकझोर कर रख दिया लेकिन वह उन्हें खेल से नहीं हटा सके.

ग्रीस के एथेंस में 25 अगस्त को 2004 ओलंपिक खेलों के फील्ड हॉकी सेमीफाइनल मैच के दौरान पाकिस्तान के अली ग़ज़नफ़र  और भारत के दिलीप टिर्की के साथ गेंद के लिए लड़ते हुए/ AP/PTI
ग्रीस के एथेंस में 25 अगस्त को 2004 ओलंपिक खेलों के फील्ड हॉकी सेमीफाइनल मैच के दौरान पाकिस्तान के अली ग़ज़नफ़र  और भारत के दिलीप टिर्की के साथ गेंद के लिए लड़ते हुए/ AP/PTI

इस चोट के बारे में विस्तार से ओडिशा के खेल पत्रकार सतीश कुमार ने ट्राइबल खबर को बताया. उन्होंने कहा कि, ‘’हमने उस वक्त दिलीप से कहा था कि अगर टखना ठीक हो जाएगा तो वह कम से कम 50 से 100 मैच और खेल सकता है. दिलीप ने इसके लिए काफी प्रयास किए, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. और साल 2010 में दिलीप को सन्यास लेना पड़ा.’’

दिलीप तिर्की हॉकी के पहले खिलाड़ी हैं जिन्हें हॉकी इंडिया का अध्यक्ष बनाया गया है. इससे पहले वह ओडिशा में हॉकी के विकास के लिए ओडिशा सरकार के साथ मिलकर लगातार काम करते रहे हैं.

भारतीय हॉकी टीम में दिलीप आजाद भारत के पहले आदिवासी कप्तान हैं. वह एक पूर्व भारतीय फील्ड हॉकी खिलाड़ी हैं, जो मुख्य रूप से फुल-बैक के रूप में खेलते थे. वह अपने पेनल्टी कॉर्नर-किक के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं. इसके साथ ही अपने 15 साल के करियर में 412 मैच खेल चुके हैं. वह इकलौते आदिवासी हॉकी खिलाड़ी हैं जिन्होने तीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया.

राजनीति में भी दिवाल बनकर रहे

दिलीप तिर्की 1928 में जयपाल सिंह मुंडा के बाद ओलंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले दूसरे आदिवासी खिलाड़ी हैं. दिलीप तिर्की के सन्यास के बाद ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक उनके संपर्क में लगातार रहे. उनसे कहा कि अब उन्हें एक प्रशासक की भूमिका में आनी चाहिए. उनके कहे को मानते हुए दिलीप ने कुछ समय तक ओडिशा के पर्यटन और खेल को बेहतर बनाने के लिए काम किया. फिर सीधे राजनीति में उतर आए.

साल 2012 में वह नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल ने उन्हें राज्यसभा में उन्हें अपनी पार्टी का नेता बनाया. यहां भी उन्होंने सबसे बेहतरीन पारी खेली. संसदीय आंकड़ें इसकी गवाही देते हैं. आंकड़ों के मुताबिक 22 मार्च 2012 से अप्रैल 2018 तक उन्होंने कुल 389 सवाल पूछे. यह किसी भी सांसद द्वारा राज्यसभा में पूछे गए सवाल में सबसे अधिक था. सवाल पूछने के मामले में सांसदों के एवरेज को देखें तो यह 377 रहा था.

अपना पहला अतंर्राष्ट्रीय मैच 1995 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला. एक ठोस फुल-बैक और पेनल्टी कॉर्नर हिटर की भूमिका निभाते पूरे 15 साल देश के लिए खेला. साल 2010 में सन्यास की घोषणा कर दी थी.

नीले शर्ट में दिलीप तिर्की

दिलीप तिर्की की उपलब्धियां:-

•          2009 में “रिको हॉकी स्टार ऑफ द ईयर” के रूप में वोट किया गया

•          2004 में प्रतिष्ठित “पद्म श्री” और “बीजू पटनायक स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ द ईयर” पुरस्कार प्राप्त किया

•          हैदराबाद में आयोजित 2003 एफ्रो-एशियाई खेलों में टीम इंडिया की स्वर्ण पदक जीत में एक कप्तान के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

•          बुसान में आयोजित 2002 के एशियाई खेलों में टीम इंडिया के रजत पदक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

•          भारत सरकार द्वारा 2002 में प्रतिष्ठित “अर्जुन पुरस्कार” से सम्मानित

•          बैंकाक में आयोजित 1998 के एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उसी वर्ष, उन्हें 1998 में “ओएनजीसी-हॉकी ईयर बुक” पुरस्कार मिला

•          1997 में पोलैंड में आयोजित अंडर-21 चैलेंजर्स कप टूर्नामेंट में भारत की जीत में सहायक

•          1996 में कर्नाटक सरकार, भारत द्वारा “एकलव्य पुरस्कार” प्राप्त किया

•          1995 में चेन्नई में आयोजित SAF खेलों में टीम इंडिया के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया

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