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छत्तीसगढ़: 10 माह बाद भी नहीं हो पाई आदिवासी अभ्यार्थियों की सीधी भर्ती

Posted on March 23, 2023 - 12:02 pm by

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में कमजोर आदिवासी समुदाय(PVTGs) कमार भुंजिया जनजाति के अभियार्थियों के द्वारा गरियाबंद के गांधी मैदान में धरना दे रहे हैं. उनकी 19 सूत्रीय मांगे हैं, जिसमें सीधी भर्ती, वन अधिकार पट्टा, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी का नियमितीकरण प्रमुख है. धरना दे रहे आदिवासी युवाओं का आरोप है कि उनके साथ सीधी भर्ती के नाम पर जिला प्रशासन के द्वारा छला गया है.

क्या है मामला

कुछ महिने पहले जिला गरियाबंद के पूर्व कार्यालय कलेक्टर के द्वारा विज्ञापन जारी किया गया था. जिसमें जिले के विभिन्न आदिवासी विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के युवकों को डायरेक्ट तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों में भर्ती किया जाना था.

इच्छुक अभ्यर्थियों को सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग कक्ष क्रमांक 56 संयुक्त जिला कार्यालय में 4 अगस्त 2022 तक निर्धारित दस्तावेज आवेदन प्रस्तुत करने कहा गया था. इस बीच आवेदकों ने दो बार टेस्ट परीक्षा दी. दावा-आपत्ति के बाद पात्र-अपात्र की अंतिम सूची तैयार की गई. लेकिन 9-10 माह बाद भी नियुक्ति को लेकर जिम्मेदार अधिकारी उदासीन हैं.

विज्ञापन की सारी प्रक्रिया पूरी कर लेने के बाद भी जिला प्रशासन की तरफ से कोई हलचल नहीं है. भर्ती लेने के बजाय जिला कलेक्टर आरक्षण का हवाला देने में व्यस्त है.

आरक्षण का बहाना कर नहीं दे रहे नौकरी

धरना दे रहे खगेश्वर ने कहा कि कलेक्टर लिखित में दे दे कि कमार भुंजिया को नौकरी नहीं देंगे तो हम सब लौट जाएंगे. आरक्षण का बहाना करके जिले के भोले -भाले आदिवासियों को सडक़ पर उतरने को मजबूर कर दिया है.

वहीं, चांदनी कहती है कि कलेक्टर हम लोगों को दो-दो बार परीक्षा दिलवाने के बाद भी भर्ती लेने में इनकार कर रहा है. घुमाया जा रहा है, जबकि अन्य जिले में कब की भर्ती हो गई है. कलेक्टर कहता है कि तीन लोगों का करवाता हूं, सात लोगों का करवाता हूं. कहते हैं उन लोगों को धरनास्थल पर बैठे रहने दो, कब तक बैठेंगे आदिवासी.

इस पर स्थानीय सांसद चुन्नीलाल साहू का कहना है कि अधिकारी जो मनमानी कर रहे हैं वो ठीक नहीं है. उनको विशेष पिछड़ी कमार जनजाति की बातें सहानुभूतिपूर्वक सुननी चाहिए. इस संबंध में राज्यपाल को पत्र लिखा जाएगा. इसकी जांच कराई जाएगी.

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