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ओड़िशा: दिव्यांग आदिवासी युवती जो दृष्टिबाधित क्रिकेट में धुम मचा देती है

Posted on October 19, 2022 - 5:32 pm by

आदिवासी लड़की झिली बिरुआ के धैर्य ने कई बाधाओं को जीत लिया है उसमें से सबसे बड़ी बाधा उनका दृष्टिबाधित होना है. इस तरह से उसे दृष्टिबाधित ओड़िशा महिला क्रिकेट टीम में खिलाड़ी के रुप में खेलने का मौका मिला.

बचपन में मां का साया छुटा, बाद में पिता साथ छोड़ गए

झीली बिरुआ ओडिशा के क्योंझर जिले के झंझाला में अपनी दादी के साथ रहती है, जबकि उसके दो बड़े भाई राज्य से बाहर काम करते हैं। उनके कोच सुखाराम मांझी के अनुसार जब वह पांच साल की थीं,  तब उनकी मां का निधन हो गया था और उसके पिता की दो साल पहले एक दुर्घटना में मौत हो गई थी. बेतरा में लो-प्रोफाइल छात्र होने के बावजूद  बिरुआ एक विस्फोटक खिलाड़ी थी. आज भी  जब वह OCTVIW के लिए मैच खोलती है, तो धुम मचा देती है. कोविड के दौरान उसे एक मजदूर के रूप में भी काम करना पड़ा.

2017 में प्लेयर ऑफ द मैच बनी थी

मुंडा आदिवासी लड़की के व्यवहार ने अक्सर उसकी क्षमताओं पर संदेह किया है, लेकिन उसने उन्हें मैदान पर गलत साबित कर दिया. नेत्रहीनों के लिए ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद जफर इकबाल ने 2017 में देहरादून में नेत्रहीनों के लिए एक त्रिकोणीय श्रृंखला के दौरान बिरुआ को एक कमजोर और नाजुक युवा के रूप में खारिज कर दिया था. लेकिन दिल्ली के खिलाफ 49 के अपने स्कोर के साथ वह प्लेयर ऑफ द मैच बनी थी.

2017 में भद्रक में दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में  बिरुआ ने 10 ओवर के मैच के दौरान बालासोर के खिलाफ फाइनल में अपने स्कूल के लिए सबसे तेज 28 रन बनाए और नाबाद रहे. 2018 में भुवनेश्वर श्रृंखला में  उसने कटक के खिलाफ 45 रन बनाए और फिर 15 ओवर के मैचों के दौरान भीमा भोई स्कूल के खिलाफ. दोनों में उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.

इसके तुरंत बाद  बिरुआ को OCTVIW में शामिल कर लिया गया. कोच मांझी कहते हैं कि हालांकि   झीली ईमानदारी से मैदान पर और बाहर मेरे निर्देशों का पालन करती है.

कई असफलता भी हाथ लगे

वह दिल्ली में आयोजित 2019 के पहले राष्ट्रीय टूर्नामेंट से चूक गईं. राज्य क्रिकेट संघ के इकबाल के अनुसार स्कूल ने उसे इस बारे में अंधेरे में रखा, क्योंकि हमने उसकी मांग को मानने से इनकार कर दिया कि उसके दो शिक्षक झिली के साथ हैं. वह अगले दो वर्षों तक चुप रही, क्योंकि कोविड -19 के कारण क्रिकेट बाहर था.

इकबाल का मानना ​​है कि इस युवा लड़की के लिए सीधे दूसरे राष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रवेश करना काफी चुनौती भरा था. भारत ने कभी भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में हिस्सा नहीं लिया है. लेकिन वह अगले साल बर्मिंघम में होने वाले टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकती है. उम्मीद है कि झिली इसे खेलने के लिए भारतीय टीम में होगी.

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