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पहाड़िया आदिवासियों की शैक्षणिक, आर्थिक और राजनैतिक हालात

Posted on December 24, 2022 - 2:30 pm by

विजय उरांव

भारत में कुल 75 ऐसी आदिवासी समुदाय है, जिन्हें कमजोर आदिवासी समुदाय समुह (PVTGs) में रखा गया है. उन्ही समुदायों में पहाड़िया समुदाय शामिल है. पहाड़िया समुदाय के तीन उप जनजाति है – सौरिया पहाड़िया, माल पहाड़िया और कुमारभाग पहाड़िया. हालांकि कई पुराने दस्तावेजों में कुमारभाग पहाड़िया समुदाय को आदिम जनजाति की श्रेणी के तौर पर नहीं माना गया है. वर्तमान में पहाड़िया के तीनों उपजनजातियों को झारखंड, बिहार, प. बंगाल में अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया है. पहाड़िया  समुदाय के द्वारा माल्टो भाषा बोली जाती है, जो कि द्रविड़ भाषा से संबंधित है. जनगणना 2011 में माल पहाड़िया और कुमारभाग पहाड़िया समुदाय की संयुक्त आबादी 1,82,560 है, जबकि सौरिया पहाड़िया की आबादी 51,634 है. इन सभी पहाड़िया समुदाय की कुल आबादी 2,34,194 है.

झारखंड में पहाड़िया समुदाय की जनसंख्या में माल पहाड़िया की आबादी साल 1961 में 45,423, 1971 में 48,636, 1981 में 79,322, 1991 में 86,790 तथा 2001 में 60,783 थी. सौरिया पहाड़िया की आबादी साल 1961 में 55,605, 1971 में 59,047, 1981 में 39,269, 1991 में 48,761 तथा 2001 में 61,121 थी.

वहीं ओड़िशा की बात करे तो ब्रिटिश भारत में ओड़िशा राज्य बनने के बाद पहाड़िया समुदाय को जनजाति सूची से हटा दिया गया था. पहाड़िया समुदाय ओड़िशा में कमार नाम से जाने जाते हैं, जो की छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में भी रहते हैं.

यह समुदाय सबसे पुराने निवासी में से है और मेगस्थनीज की किताब के साथ-साथ ह्वेन त्सांग के यात्रा वृतांत में इसका उल्लेख मिलता है, अब विकास से किनारे पर धकेल दिया गया है और एक पारिस्थितिक और जैविक रूप से लुप्तप्राय जनजाति है. यानि की खत्म होने के कगार पर है. वे शिकार-अभियानों पर जाते हैं. साझा-फसल के साथ-साथ झूम खेती का अभ्यास करते हैं, मिट्टी के घरों में रहते हैं, जंगल से जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करते हैं और हर्बल दवा का अभ्यास करते हैं. हालांकि गरीबी, अल्प विकास और शिक्षा की कमी ने उन्हें आधुनिकीकरण के लाभों से वंचित कर दिया है, वे मागे परब (त्योहार) को हर्षोल्लास और जीवंत गीत और नृत्य के साथ मनाते हैं.

पहाड़िया आदिवासियों की शैक्षणिक स्थिति

 पहाड़िया आदिवासियों की शैक्षणिक स्थिति बेहद खराब अवस्था में है. इसका मुख्य कारण पहाड़िया आदिवासियों के क्षेत्रों में प्राथमिक और उच्च विद्यालयों की कमी होना है. जबकि पहाड़िया आदिवासी अपने बच्चों को स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं. यही कारण है कि पहाड़िया आदिवासियों में शिक्षा दर बेहद ही दयनीय स्थिति में है. उच्च शिक्षा में उच्च विद्यालय दूर होने के कारण और आर्थिक स्थिति की वजह से जारी नहीं रख पाते हैं. हालांकि उनकी आर्थिक स्थिति कुछ मामलों में बेहतर होती दिखती है.

एक अध्ययन के अनुसार इनकी साक्षरता दर चार प्रतिशत के आसपास है. औसतन पांच प्रतिशत पुरुष व तीन प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक झारखंड के गोड्डा जिले की साक्षरता दर 56-40 प्रतिशत थी, जबकि सुंदरपहाड़ी की आधी यानी 27 प्रतिशत. सुंदरपहाड़ी पहाड़िया बहुल इलाका है, ऐसे में यहां की साक्षरता दर को गिराने में इस समुदाय की निरक्षरता बड़ी वजह है.

पहाड़िया बच्चे पढ़ाई बेहतर होते हैं, लेकिन आर्थिक वजहों से आगे की कक्षा में उनका पढना मुश्किल होता है. बच्चे जैसे ही बड़े होने लगते हैं, वे मजदूरी कर परिवार की आर्थिक मदद करने लगते हैं और पढाई छूट जाती है.

पहाड़िया आदिवासियों की आर्थिक स्थिति

पहाड़िया ज्यादातर पहाड़ियों पर रहते है जो तलहटी में रहते हैं और उन्हें हिलमैन, हिल रेस या लैंडर्स के रूप में भी जाना जाता है. पहाड़िया लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है जहां वे खेती के तरीकों को काटने और जलाने का अभ्यास करते हैं. इसके अलावा वे अपने अस्तित्व के लिए वन उत्पाद भी इकट्ठा करते हैं. सौरिया पहाड़िया ने मामूली सरकारी नौकरी की है. जनजाति के लोगों में शिक्षा व्यापक रूप से फैली हुई है लेकिन वे उच्च शिक्षा के मामले में पिछड़े हुए हैं. कुपोषण, बीमारियों और जुए ने इस जनजाति पर विनाशकारी प्रभाव डाला है.

राजनीतिक स्थिति

आदिवासियों में अन्य कमजोर आदिवासी समूहो की तरह पहाड़िया आदिवासियों का भी राजनैतिक प्रतिनिधित्व न के बराबर है. हालांकि पहाड़िया आदिवासी समुदाय सरकार से आदिम जनजाति के लिए अलग राजनीतिक आरक्षण की मांग करते रहे हैं. जिसमें कमजोर आदिवासी समूह भी अपने बातों को विशेष रूप से रख सके.

साल 2001 की जनगणना के अनुसार झारखंड में जहां 61,121 सौरिया पहाड़िया थे. वहीं 2011 में इनकी संख्या घट कर 46, 222 रह गयी. यानी दस सालों में इस आदिम जनजाति की संख्या में करीब एक चैथाई कमी आयी. यह इस जनजाति के अस्तित्व की चिंता करने वालों के लिए भयभीत करने वाला आंकड़ा है.

सौरिया पहाड़िया ऐसी आदिम जनजाति है, जो मुख्य रूप से संताल परगना क्षेत्र के जिलों गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़ में रहती है. इसके अलावा ये पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला व रांची जिले में कुछ मात्रा में पायी जाती है. साहेबगंज जिला व गोड्डा जिले का सुंदरपहाड़ी प्रखंड सौरिया पहाड़िया का केंद्रीय स्थल है, जहां इनकी बहुलता है.

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