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आंध्रप्रदेश:  आजादी 75 साल बाद भी आदिवासियों के गांव में बिजली नहीं, प्रदर्शन

Posted on October 25, 2022 - 1:45 pm by

आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीतारामा राजू जिले के आदिवासी ग्रामीणों ने सोमवार को बिजली की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. अल्लूरी जिले के बुरिगी गांव में बिजली अब तक बिजली नहीं पहुंची है. बिजली की मांग को लेकर हाथ से बने लाइटों के साथ अल्लूरी में ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया. बुरिगी गांव अल्लूरी सीताराम राजू जिले के अनंतगिरी मंडल में है.

75 साल बाद भी इस गांव को बिजली नहीं मिली है

प्रदर्शन कर रहे आदिवासी संघ के अध्यक्ष गोविंद ने कहना है कि बुरगी गांव को बिजली नहीं मिली है. आजादी के 75 साल बाद भी 500 लोगों के गांव को बिजली नहीं मिली है. वे घने जंगल में जंगली जानवरों के बीच रहते हैं.

गोविंद ने कम से कम अगली दिवाली पर बिजली मिलने की उम्मीद जताई है. और कहा कि सरकार संविधान द्वारा दिए गए जीने का अधिकार प्रदान नहीं करती है. अब भी,  हमारे गांवों को बिजली की सुविधा प्रदान करने के लिए वन देवताओं से भीख माँगकर उत्सव का आयोजन किया जाता था.

इससे पहले मई में  आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कुरनूल जिले में दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत अक्षय ऊर्जा भंडारण बिजली परियोजना की आधारशिला रखी थी. गुम्मिथम टांडा में स्थित यह परियोजना ग्रीनको ग्रुप द्वारा शुरू की गई थी. इसका उद्देश्य 5230 मेगावाट बिजली पैदा करना है.  आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री बालिनेनी श्रीनिवास रेड्डी ने जून में पहले कहा था कि राज्य सरकार आने वाले खरीफ सीजन में खेतों को दिन के समय नौ घंटे लगातार मुफ्त बिजली आपूर्ति प्रदान करेगी.

9 घंटे मिलेगी बिजली: मंत्री

पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार आने वाले खरीफ सीजन में खेतों को दिन के समय 9 घंटे लगातार मुफ्त बिजली आपूर्ति प्रदान करेगी. इसे संभव बनाने के लिए मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 1700 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. इस संबंध में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. अनंतपुर जिले में किसानों ने दिन-रात बिजली आपूर्ति की मांग की. उसी के अनुसार वहां बिजली की आपूर्ति की जाएगी.

मंत्री ने आगे कहा कि राज्य के ऊर्जा क्षेत्र पर कथित तौर पर पिछले तेदेपा शासन की नीतियों के कारण 80,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. हमारे मुख्यमंत्री कर्ज के बोझ को छिपाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने विभाग को 18,000 करोड़ रुपये की सहायता दी है.

ऊर्जा विभाग के किसी भी हिस्से के निजीकरण का कोई सवाल ही नहीं है. हम कृषि भूमि में बिजली की मोटरों के लिए मीटर लगाते रहे हैं. यह केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार है. हालांकि,  इससे किसानों पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा क्योंकि हम खेती के लिए मुफ्त बिजली मुहैया करा रहे हैं.

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