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सीएम से लेकर डीएम तक कर रहे सबर आदिवासी की फिक्र

Posted on February 8, 2023 - 5:05 pm by

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर के अस्पताल में आदिम जनजाति सबर समूह के एक व्यक्ति के चर्म रोग से बुरी तरह ग्रसित होने का मामला सामने आया है. जिसको लेकर राज्य के सीएम हेमंत सोरेन से लेकर डीएम विजया जाधव तक चिकित्सा सहायता दिलाने में लगे हुए हैं.

दरअसल पूर्वी सिंहभूम के डुमरिया प्रखंड के केंदुआ प्रखंड स्थित दंपाबेडा गांव में रहने वाले टूना सबर काफी दिनों से बीमारी से ग्रसित हैं. उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि शरीर के हड्डियों का ढांचा साफ नजर आ रहा है. वह इतना कमजोर हैं कि कहीं आ जा भी नहीं सकते हैं. इसकी जानकारी तब हुई जब केंदुआ प्रखंड की मुखिया फुलमनी मुर्मू और छात्र नेता उदय मुर्मू 4 फरवरी को सबर परिवारों की सूध लेने पहुंचे थे. वहां देखा गया कि इलाके के आधे से ज्यादा लोग बिमारी से ग्रसित हैं.

मुखिया ने बताया कि वे आधार कार्ड, पेंशन और अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं. फिलहाल दंपाबेड़ा में 15 सबर परिवार हैं. हालांकि इससे पूर्व 20-25 परिवार हुआ करते थे.  

कौन हैं सबर आदिवासी?

बता दें कि सबर आदिवासी झारखंड की एक लघु आदिम जनजाति है. इस जाति का इतिहास बहुत प्राचीन और गौरवशाली है. लाखो वर्ष पूर्व त्रेतायुग में सबर जाती का उल्लेख मिलता है. सबर को पहाड़िया खड़िया भी कहा जाता है. सबर समुदाय झारखंड विशेष संरक्षित जनजातियों में से एक है. इनकी संख्या अन्य जनजातियों के मुकाबले बहुत कम बची रह गई है. इनकी जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 9688 है. जो राज्य की जनजाति जनसंख्या का 0.11 प्रतिशत है. ये मुख्य रूप से पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूमि में रहते हैं. इसके अलावा इसकी आबादी गिरिडीह ,धनबाद, बोकारो ,गुमला, रांची, लोहरदगा आदि जिलो में भी रहती है. वर्तमान में भी इनका जीवन पहाड़ों और जंगलों के बीच ही गुजरता है.

सबर जनजाति के अधिकतर लोग टीबी और मलेरिया के शिकार हैं. प्रति हजार में 131 लोग किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हैं. इसमें सिर्फ 16 फीसद लोग ही सरकारी अस्पताल पहुंच पाते है. बाकि किस्मत के भरोसे होते हैं. सबर जनजाति के 1000 में 10 सबर की हर साल मौत हो जाती है. इस जनजाति के लोगों में सर्वाधिक कुपोषण की समस्या है.

देर रात अस्पताल पहुंची उपायुक्त

दंपाबेड़ा के सबर लोगों के वर्तमान की स्थिति के बारे में जब खबर आई, विशेषकर टूना सबर की तो फौरन उनके इलाज को लेकर संज्ञान लिया गया. ट्वीटर हैंडल आदिवासी डोट कोम ने 6 फरवरी की शाम को मंत्री चंपाई सोरेन और उपायुक्त विजया जाधव को टैग करके इस बारे में पोस्ट किया. जिसके तुरंत बाद चंपाई सोरेन ने इसे रीट्वीट कर उपायुक्त को चिकित्सा का समुचित इंतजाम करने के लिए कहा.

उसी शाम टूना सबर के बेहतर इलाज के लिए उपायुक्त के निर्देशानुसार चिकित्सा की एक टीम भेजी गई और जमशेदपुर स्थित सदर अस्पताल में भर्ती कराई गई. जिसके बाद उपायुक्त स्वयं इसकी पुष्टि के लिए आधी रात अस्पताल पहुंची. उपायुक्त ने चर्म रोग के बेहतर इलाज एवं अन्य सभी स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करते हुए बेहतर निगरानी के निर्देश दिया है.

सबर आदिवासियों के लिए लगाई गई स्वाथ्य शिविर

हेमंत सरकार की पहल पर आदिम जनजाति सबर समुदाय के टूना को नया जीवन मिला है. चर्म रोग से ग्रसित टूना सबर को सरकार की तरफ से अस्पताल की पूर्ण सेवा प्रदान की जा रही है. चिकित्सकों ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही टूना सबर अपने पुराने स्वरूप में नजर आएंगे.

टूना सबर के इस हालात से दंपाबेड़ा गांव के विलुप्त होती आदिम जनजाति सबर समुदायों के दयनीय स्थिति की जानकारी हुआ. मंत्री चंपाई सोरेन और उपायुक्त के निर्देश पर गांव में विशेष शिविर लगाकर सभी सबर परिवारों के स्वास्थ्य जांच की गई. बता दें कि सबर जनजाति के बारह परिवार दंपाबेड़ा में निवास करते हैं. सभी को डाकिया योजना के तहत माह जनवरी तक खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है. मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत बकरी पालन के लिए सबर परिवार से आवेदन लिए गए हैं. जल्द सबर परिवारों को सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ दिया जायेगा.

बता दें कि सबर परिवारों के दयनीय स्थिति के बारे में पहले भी यानी 29 दिसंबर 2022 को अखबार में छपी थी, जिसके बाद पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त विजया जाधव ने दंपाबेड़ा जाने की बात कही थीं. हालांकि जाने का कार्यक्रम नहीं बन सका था.

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