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गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने नाबा सरानिया के एसटी प्रमाणपत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

Posted on December 24, 2022 - 12:41 pm by

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एक रिट याचिका को खारिज कर दिया है. जिसमें कोकराझार निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद नबा कुमार सरानिया को कथित रूप से फर्जी अनुसूचित जनजाति (सादा) प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में अदालत द्वारा परमादेश जारी करने की मांग की गई थी.

याचिकाकर्ता के वकील ने न्यायमूर्ति माइकल जोथनखुमा की खंडपीठ को सूचित किया था. जिसमें 11 जून, 2019 को राज्य स्तरीय जांच समिति के अध्यक्ष के साथ फर्जी एसटी प्रमाणपत्र के संबंध में एक शिकायत दर्ज की गई थी. जिसमें मामले की जांच की मांग की गई थी.

हालांकि वकील ने कहा कि राज्य स्तरीय जांच समिति ने शिकायत करने से मना किया है.  जिसका गठन मैदानी जनजाति और पिछड़ा वर्ग (डब्ल्यूपीटी और बीसी) विभाग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के अनुसार किया गया था.

सरानिया को रिट में पक्षकार नहीं बनाया गया है

दूसरी ओर  डब्ल्यूपीटी और बीसी विभाग के वकील ने मामले में याचिकाकर्ता के लोकस स्टैंडी पर सवाल उठाया और आगे बताया कि नाबा कुमार सरानिया को रिट याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है.

खंडपीठ ने कहा कि पहले के एक मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्धारित किया था कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट याचिका या तो एक वैधानिक या कानूनी अधिकार लागू करने के लिए या जब याचिकाकर्ता द्वारा शिकायत की जाती है कि अधिकारियों की ओर से वैधानिक कर्तव्य उल्लंघन हुआ है.

इसने यह भी कहा कि अदालत किसी व्यक्ति के कहने पर अपने रिट क्षेत्राधिकार का उपयोग करके एक वैधानिक कर्तव्य के प्रदर्शन को लागू कर सकती है. बशर्ते कि ऐसा व्यक्ति अदालत को संतुष्ट करे कि उसे इस तरह के प्रदर्शन पर जोर देने का कानूनी अधिकार है.

पीड़ित व्यक्ति वह होना चाहिए जिसका अधिकार प्रभावित हो रहा हो

खंडपीठ ने आगे कहा: “अभिव्यक्ति ‘पीड़ित व्यक्ति’ में वह व्यक्ति शामिल नहीं है जो मनोवैज्ञानिक या काल्पनिक चोट से पीड़ित है. पीड़ित व्यक्ति आवश्यक रूप से वह होना चाहिए जिसका अधिकार या हित प्रतिकूल रूप से प्रभावित या खतरे में पड़ा हो.”

यह देखते हुए कि नबन कुमार सरानिया को एसटी (पी) प्रमाणपत्र जारी करने के कारण याचिकाकर्ता यह दिखाने में असमर्थ रहा है कि उसका कानूनी अधिकार किसी भी तरह से प्रभावित हुआ है.  उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने रिट याचिका को खारिज कर दिया. हालांकि  खंडपीठ ने राज्य स्तरीय जांच समिति के अध्यक्ष को याचिकाकर्ता की 11 जून, 2019 की पूर्व शिकायत के संबंध में दो महीने के भीतर स्वतंत्र निर्णय लेने को कहा.

कौन है नाबा कुमार सरानिया

एक पूर्व चरमपंथी सरानिया पश्चिमी असम के कोकराझार संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. सरानिया 1980 के दशक में गैरकानूनी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम में शामिल हुए थे. उन्होंने म्यांमार और अफगानिस्तान में हथियारों का प्रशिक्षण प्राप्त किया था. तब हीरा सरानिया के नाम से जाने जाते थे. वे यूनाइटेड लिबर्शन फ्रंट ऑफ असोम संगठन के एक बड़े स्ट्राइक बटालियन के कमांडर थे.

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