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गुजरात: खानाबदोश जनजातियों द्वारा बनाए उत्पादों की प्रदर्शनी शुरू

Posted on December 23, 2022 - 4:28 pm by

अहमदाबाद के रमोल की मदारी महिलाओं और राजस्थान के बूंदी की कालबेलिया महिलाओं द्वारा बनाए गए सामान 21 दिसंबर से 26 दिसंबर तक अहमदाबाद में भाषा रिसर्च एंड पब्लिकेशन सेंटर (बीआरपीसी) द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी – क्राफ्टिंग लाइवलीहुड ऑफ नोमैडिक कम्युनिटीज में प्रदर्शित की जा रही है.

भाषा के ट्रस्टी डॉ मदन मीणा के अनुसार, “हमने इन समुदायों की महिलाओं के कौशल की मैपिंग की है.  उनके शिल्प की पहचान की है… अब समय आ गया है कि उन्हें मंच प्रदान किया जाए,  उनके शिल्प और रोजगार आश्वासन को अगले स्तर तक ले जाया जाए.

आठ महिनों में बनाए हैं कई सामान

शुभ्रा सिंह ने कहा कि आठ महीनों में मदारी महिलाओं द्वारा वॉल हैंगिंग, बैग, स्कार्फ, मोज़े, बालों के बैंड और टोपी सहित कई सामान बनाए गए. “हमारे पास ‘भारत’, कढ़ाई की तीन श्रेणियां हैं. एक है सूई का काम, जिसमें सूती धागे का उपयोग करके किया जाता है, फिर ऊन का उपयोग करके क्रॉचिंग की जाती है, और कपास और ‘पन्नी-डोरी’ (प्लास्टिक लेस) का उपयोग करके ब्रेडिंग की जाती है. शुभ्रा ने  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन, अहमदाबाद से स्नातक किया है. शुभ्रा सिंह अप्रैल 2022 से इन महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही है.

वर्ष 2019 से शुरूआत हुई है यह परियोजना

मीना ने कहा कि वर्ष 2019 में शुरू हुई इस परियोजना के पीछे पाइरेस सिंह मार्गदर्शक हैं. पाइरेस ने खुद राजस्थान के एक समुदाय से तकनीक सीखी है. पाइरेस एनआईडी अहमदाबाद में प्रोफेसर हैं. वे प्लाई-स्प्लिट ब्रोडिंग के लिए जाने जाते हैं.

एक अन्य खंड में  राजस्थान में बूंदी के कालबेलिया समुदाय द्वारा बनाए गए बैग, बेडशीट, तकिए के कवर, वॉल हैंगिंग आदि को प्रदर्शित किया गया है. मीना ने कहा, “उनका शिल्प अब काफी उन्नत है, और उन्हें हमारी पहल से बहुत फायदा हुआ है.”

डी-नोटिफाइड जनजाति के लोगों ने प्रदर्शनी लगाई है

दोनों समुदाय डी-नोटिफाइड जनजाति हैं – कालबेलिया और मदारी. यह परियोजना गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में ऐसे समुदायों के कौशल को बढ़ाने, शिक्षित करने, आजीविका प्रदान करने, नेतृत्व विकास, कानूनी अधिकार, सांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण प्रदान करने के लिए है.

मीना के अनुसार, समुदायों की महिलाओं का उत्थान महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उनके बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा के साथ-साथ आजीविका सुनिश्चित होगी. इस पहल का उद्देश्य उनके कौशल को बनाए रखना भी है. “इन समुदायों के पास ज़हर निकालने, पहचानने आदि के कौशल हैं. समुदाय चिकित्सा क्षेत्र में योगदान दे सकता है.”

मीणा ने कहा कि अगला चरण उन्हें कार्यशालाओं में शामिल करना होगा. छोटा उदेपुर जिले के तेजगढ़ में आदिवासी अकादमी में भाषा दुकान में मदारी महिलाओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी.

बीस  वर्षीय शोभा मदारी ने कहा, “यहां हमारी सारी मेहनत देखकर, हम आत्मविश्वास महसूस करते हैं, और आगे भी काम करना चाहते हैं.”

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