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गुजराती कंपनी ने बनायी जय जोहार गुटखा, आदिवासियों में उबाल, जानिए पूरा मामला

Posted on February 18, 2023 - 4:26 pm by

एक पान मसाले का नाम जय जोहार लिखने पर देशभर के आदिवासी समुदाय ट्वीटर विरोध जाहिर कर रहे हैं. आदिवासियों ने इस शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई है. इस शब्द को गुटखे के पैकेट पर लिखे जाने को अपमान बताया है. आदिवासियों ने गुटखे के पैकेट से जय जोहार शब्द को हटाने की मांग की है और दूसरे शब्द का प्रयोग करने को कहा है. इसके अलावा उस कंपनी पर सख्त कार्यवाई की मांग की है.

इस कंपनी ने किया है आदिवासियों का अपमान

दरअसल  चार महीने पहले पिछले साल अक्टूबर 2022 में जय जोहार प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी बनायी गई थी. यह कंपनी दाहोद के गुजरात में रजिस्ट्री की गई है. इस कंपनी के दो निदेशक हैं सब्बीर अब्दुल रहीम मोधिया और संदीप रमेश चंद्र.

बता दें कि भारत के छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान आदि राज्यों में जोहार या जय जोहार के साथ संबोधन किया जाता है. हाल ही में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आधिकारिक रूप से सभी अधिकारियों को जोहार से संबोधन करने का आदेश दिया था.

जोहार शब्द का अर्थ सभी सजीव और निर्जीव प्रकृति के अंगों की जय है, जोहार का अर्थ सबका कल्याण करने वाली प्रकृति की जय. इस तरह से जोहार का अर्थ प्रकृति के प्रति संपूर्ण समर्पण का भाव ही जोहार है.

आदिवासियों ने ट्वीटर पर गुस्सा जाहिर किया

ट्वीटर यूजर प्रगनेश भगारिया ने टवीट किया है कि जोहार शब्द आदिवासी समाज का उद्बोधन है, इसका नाम विमल गुटखे के पैकेट पर लिखकर अपमान किया जा रहा है. तत्काल प्रभाव से जोहार शब्द पैकेट से हटाया जाए, और दूसरा नाम रखे, सक्त कार्यवाही होनी चाहिए.

वहीं आदिवासी डॉट कॉम ने ट्वीट किया है कि जोहार” या “जय जोहार” का इस्तेमाल अभिवादन व शुभकामना के लिए होता है. कुछ घटिया मानसिकता वाले लोगों द्वारा पान मसाला/ गुटखा जैसी हानिकारक व नशे वाली वस्तु पर इसका इस्तेमाल अपमानजनक है. यह समाज को नशे में धकेलने की साजिश है. इसे रोकें.

किसान पुत्र हरिराम नामक यूजर लिखते हैं कि जय जोहार के साथ खिलवाड़ बर्दास्त नहीं करेंगे, जोहार शब्द सम्मान का शब्द है, और जोहार शब्द का पैरों मे, या कचरे मे फेंक देना, ये आदिवासियों का अपमान है, कोई #गुजरात की कम्पनी है.

जोहार वाले इंडिजीनियस ट्वीटर यूजर लिखते हैं कि जोहार का मतलब होता हे प्रकृति की जय हो हम आदिवासी जोहार का अपमान नही सहेंगे. मुझे लगा कोई आदिवासी मित्र होगा जो “जोहार” शब्द से बिसनेस चलाने की कोशिश कर रहा है जिसमे पान मसाला एक प्रोडक्ट होगा. फिर थोडा गहराई से देखा तो मालिक के नाम कुछ ये है.

मुकेश RDX टुडु नामक यूजर लिखते हैं कि जोहार शब्द का अपमान करने वाले के खिलाफ भारत के हर एक कोने-कोने से एफआईआर दर्ज होनी चाहिए.. जह जोहार हम आदिवासियों के लिए सिर्फ शब्द ही नहीं.. हमारी विचार संस्कृति, संबोधन व स्वभिमान का संकेत है.

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