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हसदेव अरण्य :  कोयले के लिए लाखों पेड़ों की बलि जारी

Posted on September 27, 2022 - 10:42 am by
हसदेव जंगल की कटाई

छत्तीसगढ़ का हसदेव अरण्य देश ही नहीं दूनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जंगल की कटाई के विरोध में लोग आंदोलन कर रहे है। राहुल गांधी ने जंगल बचाने का वादा किया था। 24 सितंबर को छत्तीसगढ़ के मंत्री टीएस सिंहदेव ने सीएम बघेल के हवाले से नए खदानो पर रोक की बात कही थी। लेकिन इन तमाम बातो के बावजूद हसदेव अरण्य में अडानी के MDO वाले कोयला खदान PEKB-2 (Parsa East & Kente basan Phase 2) के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है।

हसदेव अरण्य में लाखों पेड़ों की कटाई को लेकर और नई खदानों को लेकर आदिवासी विरोध कर रहे है। सूचना के अनुसार तड़के सरपंच समेत कई आदिवासियों को पुलिस उठा कर ले गई है।

स्थानीय अखबार नई दूनिया के अनुसार हसदेव अरण्य में कोल ब्लॉक के विरोध के बीच सीएम भूपेश बघेल ने तीन प्रस्तावित कोयला खदानों पर रोक लगा दी थी। जनभावनाओं को देखते हुए हसदेव अरण्य क्षेत्र के परसा कोल ब्लॉक (हरिहरपुर – फतेहपुर), केते एक्सटेंशन, पेंडरखी कॉल ब्लॉक को अनुमति नही देने की बात कही थी। जिसमें प्रस्तावित तीन कोल खदानो के क्षेत्र से पेड़ो की कटाई भी बंद करने की बात कही थी।

कोल ब्लॉक की स्थिति

परसा कोल ब्लॉक – इसके दायरे में फतेहपुर और हरिहरपुर ग्राम आ रहे है, कॉल ब्लॉक के विरूद्ध मार्च महिने से ग्रामीणों का धरना चल रहा है। गांववालों के द्वारा फर्जी ग्रामसभा से अनुमति का आरोप लगाया जाता रहा है। मुख्यमंत्री ने इसी कोल ब्लॉक के फॉरेस्ट क्लीयरेंस को रद्द करने की सहमति दी है।

केते एक्सटेंशन – केंद्र सरकार की कोल ब्लॉक आवंटन की सूची में शामिल है। सर्वे की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जन सुनवाई होना है लेकिन ग्रामीण इस कोल ब्लॉक का भी विरोध कर रहे है।

पेंडरखी कोल ब्लॉक – केंद्र सरकार के कोल ब्लॉक की सूची में शामिल है लेकिन इसकी प्रक्रिया प्रांरभिक चरण में है, सिर्फ सर्वे का काम चल रहा है।

इन तीन कोल ब्लॉक में लगभग 16 लाख पेड़ काटे जाने हैं। इसी को लेकर शनिवार 24 सितंबर को छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव का सीएम बघेल के हवाले से बयान आता है कि हसदेव अरण्य में नई खदानों को अनुमति नहीं दी जाएगी। बावजूद इसके 27 सितंबर को पेड़ की कटाई जारी है। पेड़ो की कटाई के विरूद्ध आंदोलन कर रहे आदिवासियों का कहना है कि सरकार वादा नहीं आदेश जारी करे तभी उनका आंदोलन खत्म होगा।

हसदेव का जंगल मध्यप्रदेश के कान्हा क्षेत्र से लेकर झारखंड के जंगलों तक जुड़ा हुआ है। यह छत्तीसगढ़ के 184 कोल खदानों में से 23 हसदेव के जंगलो में है। यह जंगल मौसम परिवर्तन में अहम रोल अदा करता है। 1,70,000 हेक्टेयर में फैले हसदेव अरण्य में गोंड, लोहार, उरांव जैसी कई आदिवासी समुदाय हजारों की संख्या में है।

जून 2011 में, पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति ने वन भूमि को खनन के लिए बदलने के खिलाफ सिफारिश की। तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इस फैसले को खारिज करते हुए कहा था कि घने जंगलों से दूर क्षेत्र में कोयला खनन किया जाएगा।

2012 में, पहले चरण में PEKB कोयला खदानों में खनन के लिए वन व पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वन संबंधी मंजूरी दी गई थी। इसमें खनन को 762 हेक्टेयर तक सीमित किया गया था और 137 मिलियन टन का भंडार था।

मार्च 2022 में छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि उसने राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को पीईकेबी कोयला ब्लॉक के दूसरे चरण के तहत 1,136 हेक्टेयर क्षेत्र में कोयला खनन की अनुमति दी है।

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