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फिल्म से प्रभावित होकर कैसे सिरियल किलर बना एक आदिवासी?

Posted on September 28, 2022 - 8:21 am by

भारतीय हिंसात्मक फिल्में वास्तविक में भी आम लोगों को हिंसा के लिए प्रेरित कर रही है, ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश में देखने को मिला है। मध्यप्रदेश के सागर और भोपाल में चार चौकीदारों को मौत के घाट उतारने वाले सीरियल किलर को पुलिस ने भोपाल के खजूरी ( बैरागढ़) क्षेत्र से 3 सितंबर गिरफ्तार किया था। आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज में चौकीदार की हत्या के बाद चोरी मोबाइल को ऑन करते ही वह पुलिस के सर्विलांस के रडार पर आ गया। जहां उसने मोबाइल ऑन किया था किलर पुलिस को वहीं बैठा मिला। उसने भोपाल के खजूरी के एक मार्बल पीठे के चौकीदार को भी सोते समय सिर फोड़कर मार डाला था। यह सिरियल किलर एक आदिवासी है नाम है शिवप्रसाद धुर्वे।

इन चार चौकिदारों की हत्या की है सिरियल किलर शिव प्रसाद धुर्वें ने

भोपाल में 1 सितंबर को रात डेढ़ बजे 27 साल के सोनु वर्मा मार्बल शॉप में ड्युटी पर थे। और सो रहे थे इसी के दौरान आरोपी शिव ने सिर पर मार्बल के टुकड़े से वार कर हत्या कर दी। घटना सीसीटीवी में कैद हो गई, सागर में 30 अगस्त को रात में 1 से 4 बजे के बीच 40 वर्षीय मंगल अहिवार को कारखाना में सोता देख फावड़े से सिर पर वार किया किया, मौके पर खून से सना फावड़ा मिला। सागर में 29 अगस्त को रात 1 से 3 बजे के बीच आर्ट एंड कॉलेज परिसर में 60 साल के शंभूदयाल दुबे ड्युटी कर रहे थे। आंख लगने पर आरोपी ने पत्थर से सिर कुचला। मौके पर मोबाईल की बरामदगी हुई है। सागर में ही 27 अगस्त को रात 1 से 3 बजे 57 साल के कल्याण सिंह लोधी को भैंसा क्षेत्र में सोते हुए कल्याण को हथोड़े से वार कर हत्या की। सीसीटीवी में घटना कैद।

केजीएफ और पुष्पा से प्रभावित था अपराधी

पुलिस के पुछताछ में उन्होने बताया था कि KGF-2 और पुष्पा फिल्म अच्छी लगती है, हत्या से पहले इन्ही फिल्मों को मोबाइल पर देखा था। उज्जैन के गैंगस्टर दुर्लभ कश्यप से प्रभावित था और उसके जैसा ही बनना चाहता था।

जानिए सिरियल किलर शिव प्रसाद धुर्वे के बारें में

शिव प्रसाद उर्फ हल्कू। उम्र 19 साल। 8वीं तक पढ़ा है। गांव के उप सरपंच बसंत मेहर के अनुसार शिवप्रसाद बचपन से लड़ाकू प्रवृत्ति का रहा है। स्कूल में गांव के लड़कों को छोटी-छोटी बात पर पीट देता था। उसकी गांव में किसी से दोस्ती नहीं थी। सभी से झगड़ता रहता था। 6 साल पहले 13 साल की उम्र में घर से भागकर सागर आया। ट्रेन से पुणे पहुंचा। यहां होटल में नौकरी करने लगा। शिव बीच-बीच में एक-दो दिन के लिए गांव आता था। यहां किसी से मिलता-जुलता नहीं था। एक दिन होटल मालिक के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया। शिव ने उसे इतना पीटा कि अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शिव को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। पिता नन्हे आदिवासी उसे छुड़ाकर लाए। इसके बाद वह गोवा चला गया। यहां वह काम करते-करते इंग्लिश बोलने-समझने लगा।

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