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भारत में कितने जनजातीय सांस्कृतिक केंद्र है?

Posted on October 6, 2022 - 5:24 am by

विजय उरांव

मूल बिंदू

  • ट्राईबल रिपॉजिटरी में 10,000 से अधिक तस्वीरें, वीडियों प्रकाशन मौजूद है
  • राज्यों का नृवंशविज्ञान संग्रहालय विभिन्न जनजातियों के जीवन और संस्कृति से संबंधित दूर्लभ कलाकृतियों को संरक्षित और प्रदर्शित करता है।

जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए भारत में कई संस्थान बने है। जनजातीय संस्कृति हेतु केंद्र को लेकर हजारीबाग से लोकसभा सांसद (भाजपा) जयंत सिन्हा ने लोकसभा में जनजातीय कार्य मंत्री से सवाल किया था कि क्या देश में जनजातीय संस्कृति के लिए कोई केंद्र है, यदि हां तो उसका ब्यौरा क्या है, ऐसे केंद्रों को निर्माण और विकास की सहायता हेतु मंत्रालय की योजनाओं, कार्यक्रमों और पहलों का ब्यौरा क्या है, मंत्रालय द्वारा जनजातीय संस्कृति, अभिलेखागार और कलाकृतियों के संरक्षण और संवर्धन हेतु क्या कदम उठाये जा रहे है। झारखंड में विशेषकर हजारीबाग और रामगढ़ जिलों में मंत्रालय द्वारा की गई पहलों का ब्यौरा क्या है।

इसका जवाब देते हुए जनजातीय कार्य राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय जनजातीय संस्कृति सहित संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नोडल मंत्रालय है, जैसा कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा सुचित किया गया है। पूरे देश में लोक कला और जनजातीय संस्कृति के विभिन्न रूपों के संरक्षण और संवर्धन के लिए, भारत सरकार ने पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में मुख्यालय के साथ सात क्षेत्रिय सांस्कृतिक केंद्र(जेडसीसी) स्थापित किए है। यो जेडसीसी अपने सदस्य राज्यो में नियमित आधार पर सांस्कृतिक गतिविधियों/कार्यक्रमों का आयोजन करते है, जिसके लिए मंत्रालय द्वारा उन्हें इस उद्देश्य के लिए वार्षिक सहायता अनुदान प्रदान किया जाता है। इन गतिविधियों के लिए, जनजातीय कलाकारों को इन जेडसीसी द्वारा लगाया जाता है उनकी सहायता करने और उनके द्वारा अपनी जीविका अर्जित करने के लिए उन्हें मानदेय, टीए/डीए, बोर्डिंग और लॉजिंग और स्थानीय परिवहन का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा पुर्वोत्त्र राज्यो की लोक/जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने और उत्तर पुर्व की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए सभी सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों द्वारा ऑक्टेव (पुर्वोत्तर का एक उत्सव) आयोजित किया जाता है। संस्कृति मंत्रालय के तहत, केंद्रीय हिमालयी संस्कृति अध्ययन संस्थान, दाहुंग (अरुणाचल प्रदेश) और उत्तर पुर्वी राज्यों में स्थित तीन अनुदान प्राप्त निकाय जो पुर्वोत्तर क्षेत्र की लोक / जनजातीय कला और संस्कृति को संरक्षित और बढ़ावा देने में लगे है। –

  1. बौद्ध अध्ययन केंद्र, तवांग मठ, अरूणाचल प्रदेश
  2. नामग्याल इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बतोलॉजी, गगटॉक
  3. जीआरएल मोनेस्टिक स्कूल, बोमडिला, अरूणाचल प्रदेश

जनजातीय कार्य मंत्रालय “जनजातीय अनुसंधान संस्थान को सहायता” और “जनजातीय अनुसंधान, सूचना, शिक्षा, संचार और कार्यक्रमों” की योजनाओं को लागु कर रहा है। जिसके तहत जनजातीय संस्कृति, अभिलेखागार, कलाकृतियों, जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाजों और परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गतिविधियां की जाती है। जैसे –

  1. जनजातीय लोगों की वीरता और देशभक्ति के कार्यों को सम्मानित करने और क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए मंत्रालय ने 10 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय स्थापित करने की मंजूरी दी है।
  2. मंत्रालय ने खोजने योग्य डिजीटल रिपॉजिटरी (निदान) विकसित किया है, जहां सभी शोध पत्र, किताबें, रिपोर्ट और दास्तावेज, लोकगीत, फोटो/विडियों अपलोड किए गए है। इस रिपॉजिटरी में 10,000 से अधिक तस्वीरें, वीडियों प्रकाशन है। जो ज्यादातर टीआरआई द्वारा संजोए जाते है। इन रिपॉजिटरी को https://repository.tribal.gov.in (जनजातीय डिजीटल डाक्युमेंट रिपॉजिटरी) और https://tribal.nic.in/repository (ट्राईबल रिपॉजिटरी) पर देखा जा सकता है।
  3. मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर आदि महोत्सव उत्सव औयोजित करने के लिए ट्राईफेड को निधि प्रदान करता है। राज्य स्तर के त्यौहार जैसे नागालैंड का हॉर्नबिल त्योहार, तेलंगाना का मेदराम जत्रा को टीआरआई योजना के माध्यम से वित्त पोषित किया जाता है।
  4. ट्राइफेड, जनजातीय उत्पादकों के आधार के विस्तार के लिए राज्यों/जिलों/गांवों में सोर्सिंग स्तर पर नए कारीगरों और नये उत्पादों की पहचान करने के लिए जनजातीय कारीगर मेलो (टीएएम) का आयोजन करता है।
  5. राज्यों का नृवंशविज्ञान संग्रहालय विभिन्न जनजातियों के जीवन और संस्कृति से संबंधित दूर्लभ कलाकृतियों को संरक्षित और प्रदर्शित करता है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय राज्यों को उनके प्रस्ताव के आधार पर केंद्र प्रायोजित योजना टीआरआई को सहायता के तहत निधियां जारी कर रहा है। मंत्रालय ने राज्य सरकार के साथ संयुक्त रूप से रांची में बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय और उद्यान की स्थापना की है, जिसका उदघाटन 15 नवंबर 2021 को माननीय प्रधान मंत्री द्वारा किया गया था। इस दिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में भी घोषित किया गया है, जिसे भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। पिछले तीन वर्षों के दौरान “टीआरआई को सहायता” योजना के तहत झारखंड राज्य सरकार को 2019-20 में 1654.50 लाख रूपये, 2020-21 में 0.0 (यूसी लंबित होने के कारण राशि जारी नही की गई), 2021-22 में 13.92 लाख की निधि जारी की गई। युवा प्रतिभाशाली कलाकारों को पुरस्कार 2016-17 में 170 लोगों को 12.10 लाख, 2017-18 में 400 लोगों को 15.5 लाख, 2018-19 में 350 लोगों को 11.10 लाख, 2019-20 में 170 लोगों को 3.25 लाख रूपये।

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