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संघर्ष और हौसला अगर देखना है तो फुटबॉल टीम की इन खिलाड़ियों के बारे में जानिये

Posted on October 10, 2022 - 10:53 am by

नेहा बेदिया/साजिद अमीन

इन फुटबॉल खिलाड़ियों ने U-17 फीफा महिला विश्व कप तक के सफर में पहुंचने के लिए बहुत ही संघर्ष किया है। यह ऐसा सफर जहां भारत पहली बार U-17 फीफा महिला विश्व की मेजबानी कर रहा है। वहीं पहली बार फुटबॉल खिलाड़ी काफी संघर्ष के बाद यहां तक पहुंची है। आइये जानते हैं इन खिलाड़ियों ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कितना संघर्ष किया। कई कठिनाईयां उनके जीवन में आयी लेकिन उन्होंने उसका डटकर सामना किया, जो सबके लिए प्रेरणादायक है।

नौ साल की उम्र में मां का निधन, लेकिन नहीं टूटा हौसला

मिडफील्डर नीतू लिंडा

Nitu Linda/AIFF

मिडफील्डर नीतू लिंडा रांची के कांके प्रखंड की हल्दगाम गांव की रहनेवाली हैं. चार साल की उम्र से ही फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया। लेकिन खेल के साथ ही उनका संघर्ष भी बढ़ने लगा। मात्र नौ साल की उम्र में उनकी मां की मृत्यू हो गयी। परिवार का भरण-पोसन के लिए पिता दूसरों के खेतों तथा भाई ईंट-भट्टों में मजदूरी करने लगे। उसकी बड़ी बहन मीतू बताती है कि कभी-कभी नीतू स्वयं भी ईंट-भट्टों व खेतों में मजदूरी कर परिवार के लिए अनाज के पैसे जुटाया करती थी। विश्व कप के लिए चुने जाने से पहले वह जमशेदपुर में SAFF U-18 महिला चैंपियनशिप और बांगलादेश में AFF U-19 महिला चैंपियनशिप में भारतीय महिला फुटबॉल टीम के सदस्य के रूप में अपने खेल का लोहा मनवा चुकी हैं. इसमें उसने दो-दो गोल भी किए थे।

दूसरो के घर में काम करती थी, जहां सिर्फ खाना मिल जाता था

सुधा अंकिता तिर्की

Sudha Ankita Tirkey/AIFF

गुमला की अंकिता तिर्की जो अपनी मां की कर्ज चुकाने के लिए फुटबॉल खेलना शुरू की और आज अंकिता तिर्की फीफा अंडर-17 विश्व कप खेलेगी । सुधा अंकिता तिर्की का जन्म 08 अक्टुबर 2005 को गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के खोडहा गांव में हुआ। पिता के छोड़ कर चले जाने के बाद उसकी मां के साथ गांव में शोषण होने लगा। जिसके बाद अंकिता की मां गांव छोड़ कर दानपुर आ गयी। वह स्कुल के शिक्षक के घर में काम कर के परिवार का गुजारा करने लगी। जहां उसे और दोनों बेटियों को खाना मिल जाता था।

अंकिता परिसर मिडिल स्कूल में पढ़ती थी। तब फुटबॉल खेलने की शौक चढ़ा । पढ़ाई के दोरान ही अंकिता कई फुटबॉल प्रतियोगिता में भाग ले चुकी है। जिसमें उसे कई सारे पुरस्कार भी मिले हैं। महाराष्ट्र में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के दौरान अंकिता का चयन इंडिया कैंप में हुआ। अंकिता अंडर 17 महीला वर्ल्ड कप फुटबॉल टीम की भारतीय खिलाड़ी हैं। हाल में होने वाली अंडर 17 फीफा महीला विश्व कप 2022 में फॉरवर्ड प्लेयर के रुप में खेलने जा रही है।

माता-पिता दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं

अष्टम उरांव

Ashtam Oraon/AIFF

आगामी 11 अक्टूबर से आयोजित होने वाले फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप 2022 में भारतीय महिला टीम की कप्तान चुनी गई है।

अष्टम उरांव मूल रूप से गुमला जिले के बिशनुपुर प्रखंड के एक छोटे गांव बनारी गोराटोली की रहने वाली हैं। परिवार में माता-पिता, तीन बहनें और एक भाई हैं। घर की बुरी आर्थिक स्थिति के कारण पिता हीरा उरांव और मां तारा देवी दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं। सम्पति के नाम पर कुछ खेत व सरकारी सुविधा के नाम पर एक राशन कार्ड है। जिसके कारण पक्का घर बनाने में असमर्थ हैं।

आर्थिक परेशानियों के बावजूद अष्टम उरांव के माता-पिता ने अपने बच्चों के इच्छाओं का पूर्ण सहयोग करते आए हैं। अष्टम उरांव को फुटबॉल में बचपन से ही काफी रुचि थी। हजारीबाग के सेंट कोलंबस कॉलेजिएट स्कूल में पढ़ने के साथ-साथ फुटबॉल खेलने के लिए दाखिला कराया। उसके इस मुकाम से न केवल माता-पिता बल्की पूरा गांव व झारखंड गौरवन्वित है।

हाफ पैंट पहनने से आपत्ति जताने वाले लोग आज अनीता की तारीफ करते थकते नहीं

अनिता कुमारी

Anita Kumari

फॉरवर्ड फुटबॉल खिलाड़ी अनिता कुमारी रांची के चारी हुजीर गांव की रहने वाली है। उनकी पांच बहनों में अनीता के अलावा सबसे छोटी बहन भी फुटबॉल खेलने में रुचि रखती है। पति के शराबी व बेरोजगारी से तंग आकर मां ने रेजा-कूली का काम करके परिवार का भरण पोषण किया। गांव के लोगों को उसकी बेटी के हाफ पैंट पहनने तथा फुटबॉल खेलने पर बहुत शिकायतें होती थी। लेकिन अब उनकी तारिफ करते नहीं थकते। फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप 2022 में अनीता कुमारी फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम की ओर से खेलेंगी। इससे पहले उसका चयन जमशेदपुर में SAFF U-18 चैंपियनशिप के लिए हुआ था। झारखंड की ओर से 18 गोल कर चुकी हैं।

अपनी मेहनत और परिवार के आशीर्वाद से भारतीय महिला टीम की ओर से गोल कीपिंग करेगी

अंजली मुंडा

Anjali Munda

रांची के कांके प्रखंड के नवा सोसो की रहने वाली अंजली मुंडा का चयन भारतीय महिला टीम की गोलकीपर के तौर पर हुआ है। वह अपनी मेहनत और परिवार के आशीर्वाद से अक्टूबर में होने वाली फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप 2022 में पूरे राष्ट्र खेलेगी।

मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखने वाले अंजली के पिता मंटू मुंडा ने बतया कि उसकी बेटी का रुझान बचपन से ही फुटबॉल के प्रति ज्यादा था। वह शुरू से ही एक्सपर्ट के जैसा फुटबॉल खेलती थी। एक दिन राज्य का नाम जरूर रोशन करेगी, इस उम्मीद से उसके पिता ने उसे फुटबॉल के प्रशिक्षण में लगाया। आज उसकी इस उप्लब्धि पर पूरा परिवार खुश है।

बचपन में मां का निधन, पूर्णिमा के लिए बड़ी बहन ने शादी नही की

पूर्णिमा कुमारी

Purnima Kumari/AIFF

बड़ी बहन सन्माइयत कुमारी के सहयोग व बलीदान से आज पूर्णिमा कुमारी फीफा अंडर 17 महीला विश्व कप 2022 खेलने जा रही है। बचपन में ही पूर्णिमा की माता का निधन हो गया था। पूर्णिमा का लालन पालन बड़ी बहन सन्माइयत कुमारी ने किया।

पूर्णिमा के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय रही है। पूर्णीमा के पिता अक्सर बीमार रहते थे। जिसके कारण बड़ी बहन ने शादी नहीं करने का फैसला किया। उसने अपना पूरा जिवन परिवार के भरण पोषण में लगा दी।

पूर्णीमा को बचपन से ही खेल में काफी लगाव था। बचपन में जब जानबहार स्कूल में पढ़ाई करती थी, उसी समय उसकी खेल के प्रतिभा को देख कर शिक्षक ने काफी मार्गदर्शन दिया। फुटबॉल एवं एथलेटिक्स खिलाड़ियों का चयन के लिए ट्रायल सिमडेगा में रखा गया। पूर्णीमा की प्रतिभा को देखकर आवासीय फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र हजारीबाग भेजा गया। बाद में प्रशिक्षण केंद्र ने तराश कर आगे बढ़ाया और पूर्णीमा कुमारी का भारतीय टीम के शिविर में चयन किया गया।

मेजबान भारत को ग्रुप ए में अमेरिका, मोरक्को और ब्राजील के साथ रखा गया है। भारतीय टीम 11 अक्टूबर को अमेरिका के खिलाफ अपने अभियान की शुरूआत करेगी। भारत के सभी मैच भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में होंगे। टूर्नामेंट के मैचों को भुवनेश्वर, मडगांव(गोवा) और नवीं मुंबई में 11 से अक्टूबर तक खेला जाएगा। इस मैच के प्रदर्शन के बाद से इन खिलाड़ियों को आंका जाएगा। बता दें कि भारत ने इससे पहले कभी विश्व कप नहीं खेला है।