Skip to main content

गुजरात में 2 आदिवासी युवकों ने बनायी उलटी चलने वाली कलाई घड़ी, जानिए इसकी खासियत

Posted on January 4, 2023 - 2:54 pm by

गुजरात में दो आदिवासी युवकों ने एक कलाई घड़ी का निर्माण किया है जो “प्रकृति के अनुरूप” चलती है. यह घड़ी एंटी क्लॉकवाइज चलती है. घड़ी का नाम “आदिवासी घड़ी” नाम दिया गया है. सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप पटेल उर्फ ​​पिंटू (32), तापी के डोलवन तालुका के निवासी और उसके दोस्त भरत पटेल (30) द्वारा बनाई गई थी.

वंसदा से कांग्रेस विधायक अनंत पटेल ने नवसारी स्थित सर्किट हाउस में 3 जनवरी को घड़ी का शुभारंभ किया. यह घड़ी 13 से 15 जनवरी तक छोटा उदेपुर के कावंत में आयोजित होने वाले आदिवासियों के तीन दिवसीय कार्यक्रम आदिवासी एकता परिषद में बिक्री और प्रदर्शन के लिए रखी जाएगी.

दोस्त के घर से मिली प्रेरणा

विधायक पटेल का कहना है कि आने वाले दिनों में आदिवासी समुदाय के लोगों को घड़ी बनाना और गुजरात के 14 जिलों में बेचना सिखाया जाएगा. दो साल पहले पिंटू को एंटी-क्लॉकवाइज घड़ी बनाने का विचार आया, जब वह अपने एक दोस्त के घर गए.

पिंटू ने कहा, “मेरे मित्र विजयभाई चौधरी के घर पर  मैंने एक पुरानी घड़ी देखी जो घड़ी की विपरीत दिशा में चलती है. जब मैंने इसके बारे में पूछा, तो उन्होंने मुझे बताया कि प्रकृति का चक्र और इसकी गति दाएं से बाएं एंटी क्लॉकवाइज दिशा में काम करती है,”

बन चुकी है एक हजार कलाई घड़ी

इसने पिंटू को प्रेरित किया जिन्होंने कलाई घड़ी की दुकान में काम करने वाले भरत पटेल के साथ मिलकर इस पर काम करना शुरू किया. महीनों के शोध और कड़ी मेहनत के बाद  उन्होंने दिसंबर में कलाई घड़ी का निर्माण किया. जिसमें घंटे, मिनट और सेकंड की सुई घड़ी की विपरीत दिशा में चलती है. तब से  पिंटू और भरत ने लगभग 1,000 ऐसी कलाई घड़ियों का निर्माण किया है.

आदिवासी परंपरा और प्रकृति के नियम से मेल

पटेल कहते हैं, “हमने एक आदिवासी व्यक्ति की तस्वीर और कैप्शन ‘जय आदिवासी’  के साथ नए मॉडल बनाए. हमने इस घड़ी को ‘आदिवासी घड़ी’ नाम दिया है. यह प्रकृति के अनुरूप चलता है… सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर दाएं से बाएं दिशा में (एंटी-क्लॉकवाइज) घूमते हैं. यहाँ तक कि आदिवासियों के समूह नृत्यों में भी हलचल दाएँ से बाएँ होती है. हम आदिवासी सभी रस्में दायें से बायें करते हैं.”

पांच हजार घड़ियों के ऑर्डर मिल चुके हैं

अब तक इन कलाई घड़ियों के सात अलग-अलग मॉडल तैयार किए जा चुके हैं और इनकी कीमत 700 रुपये से 1,000 रुपये के बीच है. हालांकि, पटेल का कहना है कि घड़ियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें फंड की जरूरत है.

उनका कहना है कि हम आमतौर पर सामान्य घड़ियों में इस्तेमाल होने वाली क्वार्ट्ज मशीनों को चलाने के लिए बटन सेल लाए. हमने मशीनों में कुछ बदलाव किए ताकि हाथों को दाएं से बाएं घुमाया जा सके… मुझे 5,000 घड़ियों का ऑर्डर मिला है, लेकिन उत्पादन के लिए पर्याप्त धन नहीं है.

आदिवासी क्षेत्रों में की जाएगी लांच

विधायक पटेल का कहना है कि उन्होंने घड़ी बनाने के लिए पिंटू को आदिवासी समुदाय के ओर सदस्यों को नियुक्त करने में मदद का आश्वासन दिया है. वर्तमान में हमने नवसारी जिले में घड़ी लॉन्च की है. लेकिन हम इसका विस्तार उमरगाम से अंबाजी तक करेंगे.  जिसमें सभी आदिवासी जिले शामिल होंगे. हम हर जिले में वितरक नियुक्त करेंगे, जो आदिवासियों को घड़ी बनाने के लिए काम पर रखेंगे. आदिवासी एकता परिषद के तीन दिवसीय आयोजन के बाद हम इन घड़ियों को गुजरात के सभी जनजातीय जिलों में भी लॉन्च करेंगे. हमारी अवधारणा सभी आदिवासियों को एक दूसरे से जोड़ने की है. हमने पृथ्वी बचाओ, जल-जंगल-जमीन, और घड़ी पर इस्तेमाल होने वाले बिरसा मुंडा के नाम से लोगो बनाने की भी योजना बनाई है.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.